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Gujarat: 'कोड़े मारने' के मामले में हाईकोर्ट का सरकार और पुलिस अधिकारियों को नोटिस, 17 जुलाई तक मांगा जवाब

Wed, 28 Jun 2023 06:18 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 28 Jun 2023 06:18 PM IST
सार

Gujarat: जनहित याचिका में दावा किया गया है कि पथराव में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने के बाद पुलिस ने 'बदला लेने के लिए' अल्पसंख्यक समुदाय के आठ से 10 लोगों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे और उनके घरों में तोड़फोड़ की।

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Junagadh `flogging' incident: Gujarat HC issues notice to govt in PIL seeking action against policemen
Junagadh Flogging' Incident - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गुजरात उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, जिन्होंने जूनागढ़ शहर में पथराव की एक घटना के बाद एक विशेष समुदाय के पुरुषों के समूह को कथित तौर पर पीटा था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एजे देसाई और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने राज्य सरकार और शीर्ष पुलिस अधिकारियों से 17 जुलाई तक जवाब मांगा है। अदालत ने सोमवार को जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था।

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अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को कोड़े मारने का आरोप
जनहित याचिका में दावा किया गया है कि पथराव में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने के बाद पुलिस ने 'बदला लेने के लिए' अल्पसंख्यक समुदाय के आठ से 10 लोगों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे और उनके घरों में तोड़फोड़ की। कथित पिटाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। यह याचिका गैर सरकारी संगठनों लोक अधिकार संघ और अल्पसंख्यक समन्वय समिति ने दायर की है। राज्य सरकार के अलावा गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक को जनहित याचिका में प्रतिवादी बनाया गया है।

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पुलिस का आरोप- पथराव में हुई एक व्यक्ति की मौत
जूनागढ़ शहर में 16 जून की रात उस समय झड़प हो गई थी जब नगर निकाय ने एक दरगाह (मुस्लिम धर्मस्थल) को विध्वंस का नोटिस दिया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि विध्वंस का विरोध कर रहे अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के पथराव में एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं, जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के आठ से 10 लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें मजेवाड़ी गेट इलाके में गेबन शाह मस्जिद के सामने खड़ा कर दिया और उन्हें कोड़े मारे। 


 

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पीआईएल में क्या गया है?
जनहित याचिका में कहा गया है कि पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, ये लोग पथराव में शामिल भीड़ का हिस्सा थे, जिसमें एक उपाधीक्षक सहित कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि ये लोग अभी भी सलाखों के पीछे हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि जनहित याचिका में दंगाइयों द्वारा दंगा, पथराव या किसी भी प्रकार की हिंसा को उचित ठहराने की मांग नहीं की गई है। 

याचिका में दावा किया गया है कि दंगे के आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जूनागढ़ पुलिस ने उनके घरों का दौरा किया और कथित पथराव व कुछ पुलिसकर्मियों को लगी चोटों का बदला लेने के लिए उनके सामान में तोड़फोड़ की।याचिका में तर्क दिया गया है कि सार्वजनिक कोड़े मारना अवैध है और यह समानता, स्वतंत्रता, जीवन के अधिकार से संबंधित भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन करता है।

याचिका में हिंसा में शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग
याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय को गुजरात सरकार को कोड़े मारने और हिरासत में हिंसा में शामिल पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने सहित उचित कार्रवाई करने का निर्देश देना चाहिए। याचिका में जूनागढ़ के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश या किसी अन्य वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी से जांच कराने की भी मांग की गई है।

जनहित याचिका में कहा गया है कि विकल्प के तौर पर आईपीएस अधिकारियों की एक टीम गठित की जाए जो जूनागढ़ रेंज या जिले से न जुड़ी हो। याचिका में उच्च न्यायालय से यह भी आग्रह किया गया है कि वह सरकार को यह निर्देश दे कि वह सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे जाने के पीड़ितों को अनुकरणीय मुआवजा दे।

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