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Judges Retirement: 'प्रदर्शन के आधार पर जजों की रिटायरमेंट अव्यावहारिक'; संसदीय समिति की सिफारिशों पर सरकार

Thu, 08 Feb 2024 06:19 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 08 Feb 2024 06:19 AM IST
सार

सरकार ने कहा है कि जजों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने में प्रदर्शन को आधार बनाना व्यावहारिक नहीं है। लोकसभा में संसदीय समिति की रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद सरकार ने संसदीय समिति की सिफारिशों पर प्रतिक्रिया दी है।

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Judges Retirement Age Parliamentary Panel Report in Lok Sabha Centre Reply
लोक सभा की कार्यवाही (वीडियो ग्रैब- संसद टीवी यूट्यूब) - फोटो : social media

विस्तार

केंद्र सरकार ने संसदीय समिति को बताया कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की आयु उनके प्रदर्शन के आधार पर बढ़ाना व्यावहारिक नहीं हो सकता है। इससे संसद की शक्तियां और कमजोर होंगी व अनुचित पक्षपात भी हो सकता है। सरकार ने यह टिप्पणी संसद के बजट सत्र के दौरान की। लोकसभा में पेश रिपोर्ट पर सरकार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह सिफारिशों पर आगे की कार्रवाई के लिए इच्छुक नहीं है।
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कितनी आयु में रिटायर होते हैं जज
कानून और कार्मिक संबंधी स्थायी समिति ने पिछले साल अगस्त में न्यायिक प्रक्रियाओं और उनके सुधारों पर अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के कार्यकाल को मौजूदा सेवानिवृत्ति की आयु से आगे बढ़ाने के लिए एक प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली की सिफारिश की थी। वर्तमान में, सुप्रीम कोर्ट के जज 65 और हाईकोर्ट के जज 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।
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कॉलेजियम को सशक्त बनाया जाएगा
समिति की सिफारिशों पर जवाब देते हुए सरकार ने कहा, व्यक्तिगत आधार पर विस्तार देने के समय जजों के मूल्यांकन के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को सशक्त बनाया जाएगा और इससे संसद की शक्तियां कमजोर होंगी। कॉलेजियम के माध्यम से न्यायपालिका को उम्र बढ़ाने का निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा।
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हो सकता है पक्षपात
न्याय विभाग ने यह भी कहा कि इस कदम के परिणामस्वरूप पक्षपात भी हो सकता है। इससे जज दबावों के प्रति संवेदनशील बन सकते हैं, जिससे निष्पक्ष जजों के रूप में उनके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, इससे न्यायपालिका और कार्यपालिका की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल सीमित जनशक्ति पर परिहार्य बोझ पैदा होगा।


सिफारिश को आगे बढ़ाने की इच्छुक नहीं
सरकार की प्रतिक्रिया को समिति ने 'न्यायिक प्रक्रियाओं और उनके सुधारों' पर अपनी पिछली रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट में शामिल किया है। कार्रवाई रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की गई। समिति ने कहा कि सरकार के जवाब के मद्देनजर वह इस सिफारिश को आगे बढ़ाने की इच्छुक नहीं है।
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