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सुप्रीम कोर्ट: न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई बरकरार, कहा- न्यायाधीश को सीजर की पत्नी की तरह संदेह से परे होना चाहिए

Sat, 07 May 2022 07:33 PM IST
Amit Mandal एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 07 May 2022 07:33 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने कहा, मामले को देखते हुए हमें वर्तमान अपील में कोई योग्यता नहीं दिखती है और इसे खारिज  किया जाता है।

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Judge, like Caesar's wife, must be above suspicion: SC on former UP Judge's plea
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ किसी के पक्ष में आदेश पारित करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई को बरकरार रखा है। आदालत ने कहा कि एक न्यायाधीश को सीजर की पत्नी की तरह संदेह से परे होना चाहिए। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ ने कहा कि न्यायिक आदेश पारित करने की आड़ में किसी के पक्ष में झुकना न्यायिक बेईमानी और कदाचार का सबसे खराब मामला है।

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बेंच ने कहा कि एक न्यायाधीश को रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों के आधार पर मामले का फैसला करना चाहिए। यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत और सामग्री थी कि अपीलकर्ता ने एक न्यायिक अधिकारी के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए दुराचार किया और कानून के विशिष्ट प्रावधानों की पूरी तरह से अवहेलना की। न्यायिक अधिकारी ने अधिग्रहित भूमि के बाद के खरीदारों का अनुचित रूप से पक्ष लेने के लिए न्यायिक आदेश पारित किया। 
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शीर्ष अदालत ने कहा, मामले को देखते हुए हमें वर्तमान अपील में कोई योग्यता नहीं दिखती है और इसे खारिज  किया जाता है। एक न्यायाधीश सीजर की पत्नी की तरह संदेह से ऊपर होना चाहिए, का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि अक्सर यह कहा जाता है कि लोक सेवक पानी में मछली की तरह होते हैं, कोई नहीं कह सकता कि एक मछली ने कब और कैसे पानी पिया।
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शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि यदि न्यायाधीश बाहरी कारणों से किसी मामले का फैसला करता है तो वह कानून के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहा है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक आदेश पारित करने की आड़ में किसी पक्ष को अनुचित पक्ष दिखाना न्यायिक बेईमानी और कदाचार का सबसे खराब मामला है।

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