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निजी डाटा बिल: विपक्ष अड़ा फिर भी आगे बढ़ेगी सरकार, असहमति के बावजूद जयराम रमेश ने की समिति के अध्यक्ष की तारीफ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 22 Nov 2021 11:00 PM IST

सार

निजी डाटा संरक्षण बिल 2019 का परीक्षण करने वाली संयुक्त संसदीय समिति ने विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच अपनी रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। बिल पर जांच के बाद सिफारिश देने के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित की गई थी और उसने दो साल बाद रिपोर्ट दी है।
संसद
संसद - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार

निजी डाटा संरक्षण बिल 2019 का परीक्षण करने वाली संयुक्त संसदीय समिति ने विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच अपनी रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि इस समिति में शामिल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और बीजू जनता दल सहित कई विपक्षी सांसदों ने इस पर असहमति दर्ज कराई है।
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सूत्रों ने बताया कि सांसदों ने बिल में क्लॉज 35 में संशोधन करने के लिए कहा है, जो केंद्र को अपनी किसी भी एजेंसी को कार्रवाई करने की छूट देने की निरंकुश शक्ति देता है। इस बिल पर जांच के बाद सिफारिश देने के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित की गई थी और उसने दो साल बाद रिपोर्ट दी है।


सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के चार, टीएमसी के दो और बीजद के एक सांसद ने समिति की सिफारिश के कुछ प्रावधानों का विरोध किया था। कांग्रेस नेता और राज्यसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने समिति के रिपोर्ट अपनाने के बाद बिल पर अपना असहमति का नोट भेजा।

उन्होंने हालांकि पीपी चौधरी की अध्यक्षता में समिति के लोकतांत्रिक तरीके से कामकाज की सराहना की। रमेश के अलावा कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी, गौरव गोगोई और विवेक तन्खा के साथ टीएमसी के डेरेक ओब्रायन व महुआ मोइत्रा और बीजद के अमर पटनायक ने भी अपनी असहमति दर्ज कराई।

मीनाक्षी लेखी के मंत्री बनने से हुई रिपोर्ट मिलने में देरी
इस रिपोर्ट में इसलिए देरी हुई, क्योंकि इसकी पूर्व चेयरपर्सन मीनाक्षी लेखी को मोदी सरकार में मंत्री बनाया गया और उनके स्थान पर चौधरी को इस समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति के पास जांच के लिए भेजा था, ताकि इस पर संसद में चर्चा हो सके और इसे पास कराया जा सके।

रिपोर्ट से असहमति, पर यह लोकतंत्र के हित में: जयराम रमेश
जयराम रमेश ने कहा, अंतत: समिति ने इसे अपना लिया। इस पर असहमति है, लेकिन यह संसदीय लोकतंत्र के हित में है। उन्होंने कहा कि वह अपना असहमति नोट देने को इसलिए बाध्य हुए, क्योंकि उनके सुझावों को नहीं माना गया। लेकिन संसदीय समिति ने जिस लोकतांत्रिक तरीके से काम किया, उसे इससे भटकना नहीं चाहिए।

विस्तृत असहमति नोट देने को बाध्य होना पड़ा: मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, मुझे इस पर असहमति का विस्तृत नोट देने को विवश होना पड़ा, क्योंकि मैं इस प्रस्तावित बिल के मूल डिजाइन से सहमत नहीं हूं। बिल की रचना में ही खामी है और यह कानून की कसौटी पर नहीं टिकेगा। इसलिए मैं इस बिल को पूरी तरह से खारिज करने को बाध्य हूं।

निजता के अधिकार की सुरक्षा की अनदेखी : ओब्रायन
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने समिति के कामकाज पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इसे जल्दबाजी में तैयार किया गया है। इसके हितधारकों को विचार-विमर्श के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, वह इस बिल का इसलिए भी विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इसमें डाटा को लेकर निजता के अधिकार की पर्याप्त सुरक्षा की कमी है।

उन्होंने बिल में गैर निजी डाटा को शामिल करने की सिफारिश का भी विरोध किया। वहीं गौरव गोगोई ने कहा कि बिल में निगरानी से होने वाले नुकसान पर ध्यान नहीं दिया गया है और यही मेरी आपत्ति है।

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