अब आसाराम के खिलाफ नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में फैसला 25 को
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अभिनेता सलमान खान को जेल और फिर मिली सशर्त बेल के बाद अब आसाराम पर लगे नाबालिग यौन उत्पीड़न के मामले में जोधपुर की विशेष एससी-एसटी कोर्ट 25 अप्रैल को फैसला सुनाएगी।
इस मामले में अंतिम बहस शनिवार को समाप्त हो गई और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में रोजाना सुनवाई चल रही थी। आसाराम ने निचली अदालतों, राजस्थान हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी बेल करवाने की 11 बार कोशिशें कीं, लेकिन सभी विफल रहीं।
गौरतलब है कि दिल्ली के कमला नगर पुलिस थाने में आसाराम के खिलाफ उसी के गुरुकुल में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा ने 20 अगस्त 2013 को यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। नाबालिग ने कहा था कि जोधपुर के निकट मणाई आश्रम में आसाराम ने 15 अगस्त 2013 को बुलाकर उसका शोषण किया।
थाने ने जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला जोधपुर में संबंधित थाने को भिजवाई। जोधपुर पुलिस ने आसाराम के खिलाफ नाबालिग का यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज किया। आसाराम को बड़ी मशक्कत के बाद 31 अगस्त 2015 को इंदौर स्थित आश्रम से रात को गिरफ्तार किया और प्लेन से जोधपुर लाया गया। तब से ही आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। आसाराम की जमानत का प्रयास राम जेठमलानी, सुब्रमण्यम स्वामी, सलमान खुर्शीद सहित देश के कई जाने-माने वकीलों ने किया, लेकिन जमानत नहीं हुई।
नाबालिग ने दिए थे ये बयान
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित गुरुकुल में पढ़ने वाली सोलह वर्षीय छात्रा ने पुलिस को बताया था कि उसे पेट दर्द था, जिसके बारे में उसने गुरुकुल में बताया। यहां एक शिक्षिका ने उसके माता-पिता को आसाराम से इलाज कराने को कहा।
आसाराम ने मणाई स्थित आश्रम में इलाज करने के लिए बुलाया था। वह माता-पिता के साथ पहुंची, जिन्हें बाहर की रोक दिया गया और यहां आश्रम में एक अंधेरे कमरे में आसाराम ने यौन शोषण किया। विरोध करने पर आसाराम ने माता-पिता को मार डालने की धमकी दी।
आश्रम में माता-पिता की जान को खतरा होने के कारण नाबालिग चुप रही, लेकिन बाद में अपने माता-पिता को सारी घटना बताई। हिम्मत जुटाकर माता-पिता बेटी को लेकर दिल्ली में एफआईआर करवाने पहुंचे।