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जेएनयू हिंसा आजाद भारत की सबसे घिनौनी घटना, कुलपति को हटाया जाए : जदयू

Mon, 06 Jan 2020 06:15 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Mon, 06 Jan 2020 06:15 PM IST
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JNU violence: JDU demands removal of VC
जदयू नेता केसी त्यागी (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार को हुई हिंसा मामले में भाजपा के सहयोगी दल चिंतित हैं। जदयू ने इसे आजाद भारत की सबसे घिनौनी घटना बताते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। जबकि लोजपा ने विश्वविद्यालय में हो रही राजनीति पर चिंता जाहिर की और कहा कि अध्ययन से जुड़ी संस्थाओं का राजनीति का अड्डा बनते देखना बेहद दुखद है।

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जेएनयू हिंसा पर जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि यह आजाद भारत की सबसे घिनौनी घटना है। इसमें पुलिस और कुलपति की भूमिका संदिग्ध है। जेएनयू अनूठा और उत्कृष्ट विश्वविद्यालय है। यहां विभिन्न विचारधारा रखने की आजादी है। इसे हिंसा का केंद्र नहीं बनने देना चाहिए। हिंसा ने विद्यार्थियों और उनके परिजनों को सशंकित और आतंकित कर दिया है। पूरे मामले में पुलिस खुद संदेह के घेरे में है। ऐसे में पुलिस जांच से बात नहीं बनेगी। 
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त्यागी ने कहा कि दोषियों को हर हाल में सजा देने के लिए इसकी न्यायिक जांच जरूरी है। इससे पहले कुलपति को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। यह पता चलना चाहिए कि परिसर में गुंडों को किसने बुलाया। बगैर अनुमति के हाथों में हथियार ले कर गुंडे विश्वविद्यालय में कैसे घुसे? तांडव के बाद सुरक्षित कैसे निकल गए? तब पुलिस वहां क्या करती रही? मामले में पुलिस की भूमिका भी जांच होनी चाहिए।
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जदयू की ये मांग इस मायने में अहम है कि वह बिहार में भाजपा की सहयोगी है। राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और अकसर किसी न किसी बात पर दोनों दलों के बीच मतभेद नजर आ ही जाते हैं। वहीं, लोजपा सांसद चिराग पासवान ने भी जेएनयू हिंसा की निंदा की। उन्होंने कहा कि देश के एक उत्कृष्ट संस्थान में हुई ऐसी घटना से वह आहत हैं। विश्वविद्यालय को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देना चाहिए।  

रविवार को भड़की हिंसा 

बता दें कि जेएनयू परिसर में रविवार रात उस वक्त हिंसा भड़क गयी थी, जब लाठियों से लैस कुछ नकाबपोश लोगों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमला कर दिया और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद प्रशासन को पुलिस को बुलाना पड़ा था।



इस हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष सहित कम से कम 28 लोग घायल हुए। वाम नियंत्रित जेएनयूएसयू और आरएसएस से संबद्ध एबीवीपी इस हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 

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