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जेएनयू की प्रोफेसर को मिला रूसी भाषा का सर्वोच्च पुुरस्कार पुश्किन मेडल
Wed, 21 Aug 2019 09:27 PM IST
Trainee Trainee
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 21 Aug 2019 09:27 PM IST
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मीता नारायन
- फोटो : फाइल फोटो
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रूस की सरकार ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश का बड़ा सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्र्यू द एपोस्टल देकर सम्मानित किया था। पीएम के बाद रूस ने भारत की एक और हस्ती को विशेष सम्मान से नवाजा है। जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) की प्रोफेसर मीता नारायन को रूसी भाषा में विशेष योगदान के लिए पुश्किन मेडल 2019 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार रूसी भाषा में योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। यह पुरस्कार बुधवार को द रशियन सेंटर फॉर साइंस एंड कल्चर में हुए एक समारोह के दौरान दिया गया।
प्रोफेसर मीता नारायन का योगदान इस अर्थ में बेहद महत्वपूर्ण है कि यूएसएसआर के विघटन के बाद उन्होंने रूसी भाषा की अनेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों को आधुनिक समय की जरुरतों और बदलावों के साथ दुबारा प्रस्तुत किया है। भारत के लिए यह एक गौरव का विषय है कि प्रोफेसर मीता नारायन की लिखी पुस्तकें देश में ही नहीं, अमेरिका और यूरोपीय देशों में भी पाठ्यपुस्तकों के तौर पर पढ़ाई जाती हैं। उन्हें पुरस्कार देने से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और मजबूत हुए हैं।
रूसी भाषा की विदुषी प्रोफेसर मीता नारायन दिल्ली के मॉडर्न स्कूल की छात्रा रही हैं। स्कूल के द्वारा भी उन्हें लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार दिया गया था। उनके साथ इस पुरस्कार को पाने वालों में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना, पाकिस्तान में भारत के राजदूत अजय बिसारिया और गुरुचरण दास शामिल हैं।
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प्रोफेसर मीता नारायन का योगदान इस अर्थ में बेहद महत्वपूर्ण है कि यूएसएसआर के विघटन के बाद उन्होंने रूसी भाषा की अनेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों को आधुनिक समय की जरुरतों और बदलावों के साथ दुबारा प्रस्तुत किया है। भारत के लिए यह एक गौरव का विषय है कि प्रोफेसर मीता नारायन की लिखी पुस्तकें देश में ही नहीं, अमेरिका और यूरोपीय देशों में भी पाठ्यपुस्तकों के तौर पर पढ़ाई जाती हैं। उन्हें पुरस्कार देने से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और मजबूत हुए हैं।
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रूसी भाषा की विदुषी प्रोफेसर मीता नारायन दिल्ली के मॉडर्न स्कूल की छात्रा रही हैं। स्कूल के द्वारा भी उन्हें लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार दिया गया था। उनके साथ इस पुरस्कार को पाने वालों में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना, पाकिस्तान में भारत के राजदूत अजय बिसारिया और गुरुचरण दास शामिल हैं।
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