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सम्मान: असमिया कवि नीलमणि फूकन को दिया गया 56वां ज्ञानपीठ पुरस्कार, पहले मिल चुका है साहित्य अकादमी और पद्मश्री
Tue, 12 Apr 2022 04:05 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, गुवाहाटी।
एजेंसी, गुवाहाटी।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 12 Apr 2022 04:05 AM IST
सार
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा और ज्ञानपीठ चयन बोर्ड की चेयरपर्सन प्रतिभा रे ने 88 वर्षीय कवि को ट्रॉफी, चेक और स्मृतिचिह्न भेंट किया। फूकन जनकवि के रूप में जाने जाते हैं। इससे पहले उन्हें साहित्य अकादमी और पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है।
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नीलमणि फूकन को 56वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया।
- फोटो : ANI
विस्तार
प्रसिद्ध असमिया कवि नीलमणि फूकन को सोमवार को 56वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया। वयोवृद्ध कवि के स्वास्थ्य को देखते हुए पहली बार इस पुरस्कार का आयोजन असम में किया गया।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा और ज्ञानपीठ चयन बोर्ड की चेयरपर्सन प्रतिभा रे ने 88 वर्षीय कवि को ट्रॉफी, चेक और स्मृतिचिह्न भेंट किया। फूकन जनकवि के रूप में जाने जाते हैं। इससे पहले उन्हें साहित्य अकादमी और पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है।
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इस अवसर पर मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा कि फूकन को मिले ज्ञानपीठ पुरस्कार ने असम वासियों को गौरवान्वित किया है। फूकन तीसरे असमी हैं, जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है।
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असम के गोलघाट जिले में 10 सितंबर 1933 को जन्मे नीलमणि फूंकन मूलत: असमिया भाषा के भारतीय कवि और कथाकार हैं। उनका कैनवास विशाल है, उनकी कल्पना पौराणिक है, उनकी आवाज लोक-आग्रह बोली है, उनकी चिंताएं राजनीतिक से लेकर कॉस्मिक तक, समकालीन से लेकर आदिम तक हैं।
वह जिन परिदृश्यों का उदाहरण देते हैं वे महाकाव्यात्मक और मौलिक हैं। वह आग और पानी, ग्रह और तारा, जंगल और रेगिस्तान, मनुष्य और पर्वत, समय और स्थान, युद्ध और शांति, जीवन और मृत्यु की बात करते हैं फिर भी उनके यहां न केवल एक ऋषि की तरह चिंतनशील वैराग्य है, बल्कि तात्कालिकता के साथ-साथ पीड़ा और हानि की गहरी भावना भी है। उन्होंने कविता की तेरह पुस्तकें लिखी हैं। सूर्य हेनो नामि अहे एई नादियेदी, मानस-प्रतिमा और फुली ठका, सूर्यमुखी फुल्तोर फाले आदि उनकी कुछ महत्वपूर्ण कृतियां हैं।
सुप्रसिद्ध कथाकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार प्रतिभा राय की अध्यक्षता के हुई चयन समिति की बैठक में वर्ष 2021 के लिए असमिया साहित्यकार नीलमणि फूकन को 56वां ज्ञानपीठ पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया था। बैठक में चयन समिति के अन्य सदस्य माधव कौशिक, सैय्यद मोहम्मद अशरफ, प्रो. हरीश त्रिवेदी, प्रो. सुरंजन दास, प्रो. पुरुषोत्तम बिल्माले, चंद्रकांत पाटिल, डॉ. एस मणिवालन, प्रभा वर्मा, प्रो. असग़र वजाहत और मधुसुदन आनन्द शामिल थे।