Interview: जेके सीमेंट के प्रबंध निदेशक डॉ. राघवपत सिंघानिया बोले- भारत आर्थिक बदलाव की राह पर
भारत के निर्माण में सीमेंट क्षेत्र की भूमिका पर खुलकर बोले जेके सीमेंट के प्रबंध निदेशक डॉ. राघवपत सिंघानिया.....
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सीमेंट क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के आठ बुनियादी क्षेत्रों में से एक है। इसकी स्थिति से देश की माली हालत बखूबी बयां होती है। तेजी से विकास पथ पर बढ़ते किसी भी देश के लिए सबसे अहम ढांचा निर्माण होता है, जिसमें सीमेंट क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
- देश के सीमेंट क्षेत्र में कई बड़े सौदे हुए हैं। इससे माहौल सकारात्मक बना है। लोगों में अपना घर बनाने की चाहत बढ़ने से सीमेंट की मांग लौटी है।
- इस समय हर क्षेत्र में नई तकनीक अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। सीमेंट क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। नवाचार की दिशा में आगे बढ़ते हुए क्षेत्र में प्रीकास्ट और थ्रीडी तकनीक आ गई है। इससे भवन निर्माण की दुनिया में व्यापक बदलाव आने की संभावना दिख रही है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक देश है। यह क्षेत्र 10 लाख लोगों को रोजगार दे रहा है। इसकी मौजूदा परिस्थितियों को आप कैसे देखते हैं? दूसरे बड़े देशों के मुकाबले हमारा सीमेंट उद्योग मांग-आपूर्ति में कहां खड़ा है?
बतौर एक देश हम तरक्की की राह पर है, जो सीमेंट में साफ तौर पर प्रतिबिंबित होती है। भारत में अब इस क्षेत्र में मजबूती आ रही है। नामी कंपनियों ने बड़े सौदे किए हैं, जिससे उद्योग को सकारात्मकता मिली है। जैसा कि पाठकों को पता होगा, जेके ग्रे और सफेद, दोनों सीमेंट बनाता है। सफेद सीमेंट में तो हमारी कंपनी दुनिया की बड़ी उत्पादक है। अब जेके वॉल पुट्टी, वॉटर प्रूफिंग और टाइल एडहेसिव जैसे भवन निर्माण से जुड़े नए उत्पाद भी ला रही है।
भारत बड़ा उत्पादक जरूर है, लेकिन सीमेंट की खपत यहां विश्व के मुकाबले काफी कम है। इसे कैसे बढ़ाया जा सकता है?
यह सही है कि देश में सीमेंट की खपत के लिहाज से जीडीपी अनुपात कम है। प्रति व्यक्ति खपत बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन अब विकास परियोजनाओं के कारण इसमें वृद्धि दिखने लगी है। जब एक देश विकासशील से विकसित होने की राह पकड़ता है, तो सीमेंट की मांग में उछाल स्वाभाविक है। आगामी तीन से चार साल में भारत में भारत में सीमेंट की खपत रफ्तार पकड़ने लगी और अपेक्षित स्तर पर दिखाई देने लगेगी।
भारत आर्थिक बदलाव की राह पर है। हम 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और 5,000 अरब डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य है। जेके इस विकास यात्रा में क्या योगदान दे सकता है?
जेके समूह हमेशा भारत के सफर का गवाह रहा है। आगे विकास गाथा में भी अहम योगदान देना चाहता है। इस दिशा में हम सीमेंट के साथ अतिरिक्त भवन निर्माण के उत्पाद लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं। पेंट कारोबार में भी कदम रख रहे हैं। हमारी कोशिश है कि एक सपनों का घर बनाने के लिए जरूरी ज्यादा-से-ज्यादा उत्पाद हम पेश कर सकें। जेके थ्रीडी प्रिंटिग और प्रीकास्ट जैसी नई तकनीक भी अपनाना चाहेगा ताकि हम देश की क्षमता निर्माण को तेजी से बढ़ा सके।
क्षमता निर्माण के लिए मौजूदा व आगामी योजनाएं?
मध्य प्रदेश के पन्ना में जेके ने एक नया प्लांट लगाया है, जहां इस साल अक्तूबर तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। स्प्लिट ग्राइंडिंग यूनिट उत्तर प्रदेश के घाटमपुर में लगाई है। इससे आगे प्रयागराज, उज्जैन जैसी जगहों पर भी स्थापित करने की योजना है। जेके के पास अगले पांच वर्षों में क्षमता निर्माण के कई विकल्प हैं। हालांकि, हरेक सीमेंट उत्पादक की भौगोलिक सीमाएं होती हैं लेकिन अब हम नए प्लांट और यूनिटों से आगामी 5-7 वर्षों में पूरे भारत तक पहुंच की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
बतौर कंपनी जेके में ऐसा क्या खास है, जो प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले उसे बेहतर बनाता है?
जेके संगठन के रूप में 135 वर्षों पुराना है। जेके सीमेंट के लगभग 50 वर्ष पूरे हो गए हैं। समूह के सिद्धांत और मूल्य हमारी ताकत हैं, जो कंपनी को अलग बनाते हैं। कर्मचारी कंपनी प्रबंधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।
हमारे व्यापार के केंद्र में खुद भारत के लोग हैं। हमारी तकनीकें आधुनिक और बेहतर हैं। मेरे ताऊजी यदुपति सिंघानिया जोर देते थे कि कंपनी को सस्ते के बजाय सबसे अच्छे उत्पाद पर फोकस करना चाहिए।
2030 तक क्या लक्ष्य हैं और कोई नवाचार की योजना है?
मैं जेके के लिए किसी आंकड़े का उल्लेख नहीं करना चाहता। लेकिन हां, हम तरक्की की राह पर हैं और बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के उपायों पर जोर दे रहे हैं। इसके लिए क्षमता बढ़ाने पर हमारा ध्यान केंद्रित है। सीमेंट क्षेत्र में नवाचार के लिए कई स्टार्टअप इन दिनों काम कर रहे हैं। अगर कोई स्टार्टअप उपयुक्त लगा तो हम उसके साथ जरूर डील करना चाहेंगे।
पीएम आवास योजना और तेजी से हाईवे निर्माण से सीमेंट जगत को ताकत मिली है। लेकिन, बढ़ती महंगाई ने बड़ी चुनौती भी खड़ी कर दी है। आप मौजूदा परिस्थिति को कैसे देखते हैं और सीमेंट क्षेत्र के लिए क्या संभावनाएं एवं बाधाएं हैं?
घरेलू स्तर पर बात करें तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सीमेंट की काफी मांग बढ़ी है, जिससे उद्योगों को फायदा मिला है। वहीं, आने वाले समय में हम पड़ोसी देशों तक निर्यात बढ़ाकर सेक्टर को मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, सीमेंट क्षेत्र के लिए ईंधन की कीमत एक बड़ी चिंता रहती है। जब इसमें उछाल आता है तो सीमेंट और भवन निर्माण उत्पादों के दाम भी बढ़ जाते हैं। समय के साथ श्रम लागत भी बढ़ी है। लेकिन जेके सीमेंट हरसंभव किफायती कीमत पर श्रेष्ठ उत्पाद मुहैया कराने पर जोर देता है और आगे भी ऐसा करता रहेगा।
लेकिन सबसे बेहतर उत्पाद सबसे सस्ता कैसे दिया जा सकता है... सुनने में यह विरोधाभासी लगता है?
अगर सही जगह, सही तकनीक और श्रमबल का उपयोग किया जाए तो यह संभव है। फिलहाल जो कीमतें बढ़ी हैं, उनमें मौजूदा वैश्विक हालात ज्यादा जिम्मेदार हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ईंधन समेत कच्चे माल के दामों में तेजी से उछाल आया है। फिर भी सरकार ने ईंधन कीमतों को काबू में रखने की काफी कोशिश की है। किसी कारोबार के लिए मुनाफा जरूरी है, लेकिन सिर्फ इसके लिए ही काम करना उचित नहीं है। समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव रखकर ही कंपनी खड़ी और बड़ी हो सकती है।
पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) भले अभी चलन में आया हो, लेकिन इस देश की कंपनियों ने तो दशकों से समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाई है।
बड़ी तादाद में ऐसे भारतीय हैं, जो पहली बार घर खरीदने या बनाने का सपना देख रहे हैं। महंगाई के दौर में उनका ख्वाब कैसे पूरा होगा?
हमें परंपरागत सोच से आगे बढ़ना पड़ेगा। प्रीकास्ट जैसी नई तकनीक के जरिये घरों के निर्माण को बढ़ावा देना होगा। इससे न सिर्फ भवन निर्माण में तेजी आएगी, बल्कि सीमेंट सेक्टर पर सकारात्मक असर पड़ेगा। इससे घर का एक बड़ा हिस्सा कारखाने से तैयार होकर जगह पर आकर लग आएगा।
यानी जिस घर को बनाने में दो साल लगते हैं, उसका निर्माण तैयार बुनियादी ढांचे के साथ 6 माह में आसानी से हो सकता है। हालांकि, इसमें एक बड़ी बाधा ढांचे को संबंधित जगह पर पहुंचाने को लेकर है, जिस पर काम करना होगा। चार-पांच वर्षों में जेके इस तकनीक में कदम रख सकता है।
कॉरपोरेट जगत में कमान संभालने वाले नए प्रबंधकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
नए प्रबंधक भारत का भविष्य हैं। अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जरूर काम करें, लेकिन जीवन में संतुलन भी बनाए रखें। सोच हमेशा सकारात्मक रखें। परिवार को समय दें, लेकिन अपने कर्मचारियों को कभी न भूलें। उन्हें अपने कर्मचारियों के प्रबंधन पर विशेष तौर पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें तेज रफ्तार से बढ़ रहे जमाने के साथ भी कदमताल करनी होगी। आजकल किसी भी कारोबार में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इन बदलावों को अपनाकर देश की तरक्की में योगदान देने के बारे में सोचना होगा।