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फिर चर्चा में जिन्ना हाउस, बीजेपी विधायक ने की इमारत गिराने की मांग
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
Updated Mon, 10 Apr 2017 07:11 AM IST
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एजेंसी/मुंबई। मुंबई स्थित जिन्ना हाउस अलग-अलग पक्षों के दावों से बार फिर चर्चा में है। मशहूर क्रिकेटर इमरान खान ने जिन्ना-गांधी मुलाकातों और देश का भविष्य पलट देने वाले मुस्लिम लीग की बैठकों के गवाह जिन्ना हाउस को लेकर कहा कि इमारतों को गिरा देने से इतिहास नहीं बदला जा सकता है।
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जिन्ना हाउस हाल में उस समय चर्चा में आ गया जब मालाबार हिल से भाजपा विधायक प्रभात लोढ़ा ने इमारत को गिरा कर उस जगह पर भारत और महाराष्ट्र के इतिहास और परंपरा को दर्शाने वाला सांस्कृतिक केंद्र बनाने की मांग की।
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जिन्ना हाउस को बंटवारे की निशानी बताते हुए लोढ़ा ने कहा कि यह इमारत भारत को बंटवारे की तरफ ले जाने वाले इतिहास का गवाह है। मुस्लिम लीग नेताओं ने दो राष्ट्र के सिद्धांत को आगे बढ़ाने के लिए 1944 से 1947 के बीच वहां कई बैठकें की थीं।
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दक्षिण मुंबई के मालाबार हिल में 2.5 एकड़ में महल की शक्ल में फैले इस इमारत को मोहम्मद अली जिन्ना ने 1936 में 2 लाख रुपये की लागत से बनवाया था। जिन्ना ने ईंट दर ईट इमारत के निर्माण की देखरेख किया था और 1947 मेें भारत के बंटवारे तक वहीं पर रहे।
तीन दशकों से खाली इस इमारत को शिल्पकार क्लाउड बैटली ने यूरोपियन शैली में डिजाइन किया था। आजादी के बाद जिन्ना हाउस को ब्रिटिश उच्चायोग को लीज पर दिया गया था। वर्ष 1980 तक यहां ब्रिटिश उप उच्चायुक्त का आवास रहा।
वहीं पाकिस्तान ने भी मुंबई में अपना वाणिज्य दूतावास खोलने के लिए इस इमारत की मांग की है। मालाबार हिल में भाउसाहेब हिरे मार्ग पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास वर्षा के सामने स्थित जिन्ना हाउस सालों से भारत और पाकिस्तान के बीच तकरार की वजह बनता रहा है।
कई इतिहास प्रेमी महात्मा गांधी-जिन्ना मुलाकात के गवाह इस इमारत के संरक्षण की मांग करते रहे हैं। इस इमारत में आने वालों में जवाहर लाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस भी रहे हैं। लोकमान्य तिलक स्वराज भूमि ट्रस्ट के प्रकाश सिलम चाहते हैं कि शेर ए महाराष्ट्र और राष्ट्रवादी नेता बाल गंगाधर तिलक के सम्मान में स्मारक बनाने के लिए इमारत उन्हें सौंप दिया जाए।
उन्होंने कहा, जिन्ना ने स्वतंत्रता संग्राम में तिलक की मदद की थी और उनकी दोस्ती को देखते हुए जिन्ना हाउस ट्रस्ट को दिया जाना चाहिए। जिन्ना बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत करते थे। उन्होंने तिलक पर अंग्रेजी सरकार द्वारा किए गए देशद्रोह के मुकदमे में उनकी पैरवी की थी।
जतिन देसाई ने बताया बंटवारे के बाद कराची जाने के बाद भी जिन्ना अपनी जिंदगी के अंतिम दिन अपने प्यारे शहर बॉम्बे में गुजारना चाहते थे। हालांकि पाकिस्तान बनने के कुछ ही महीने बाद उनकी मौत हो गई। देसाई ने कहा कि इस इमारत को भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और दोस्ती बढ़ाने वाले केंद्र या सार्क कल्चर सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
देसाई ने कहा कि अपने घर से जिन्ना के लगाव को नेहरू समझते थे इसीलिए उन्होंने जिन्ना की मौत के बाद इमारत को शत्रु संपत्ति के बदले विस्थापित व्यक्ति की संपत्ति घोषित किया था। साल 2010 में भारत सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि जिन्ना हाउस का मालिकाना हक भारत सरकार के पास है। केंद्र ने अपने शपथ पत्र में अदालत को बताया था कि जिन्ना हाउस भारत सरकार की संपत्ति है और इस पर किसी भी अन्य व्यक्ति या संगठन का कोई अधिकार नहीं है।