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Jharkhand: माइनिंग लीज केस में हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सीएम सोरेन पर हैं आरोप 

Fri, 10 Jun 2022 02:49 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 10 Jun 2022 02:49 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने फर्जी कंपनियों से जुड़े इस मामले में एक जनहित याचिका विचारार्थ स्वीकार की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हाईकोर्ट प्रेषित किया था।

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Jharkhand: High courts decision in mining lease case challenged in Supreme Court, CM Soren and family are accused
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन व उनके परिजनों से कथित तौर पर जुड़ी फर्जी कंपनियों को खदानों की लीज आवंटन मामले में राज्य सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। 
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झारखंड हाईकोर्ट ने फर्जी कंपनियों से जुड़े इस मामले में एक जनहित याचिका विचारार्थ स्वीकार की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हाईकोर्ट प्रेषित किया था। 3 जून को झारखंड हाईकोर्ट ने सीएम सोरेन व उनके परिजनों से कथित तौर पर जुड़ी कंपनियों को खदानों की लीज आवंटित करने व उनमें निवेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को सुनवाई योग्य (Maintainable) माना था। इससे सीएम सोरेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में यह मामला गया था। शीर्ष अदालत ने याचिका की स्वीकार्यता पर विचार के लिए मामला झारखंड हाईकोर्ट को सौंपा था। हाईकोर्ट 10 जून यानी आज मामले में आगे सुनवाई करने वाली है। 
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याचिकाकर्ता के वकील राजीव कुमार के अनुसार हाईकोर्ट ने माइनिंग लीज और फर्जी कंपनियों से जुड़ी याचिकाओं पर सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया और इसे सुनवाई योग्य मानकर 10 जून से नियमित सुनवाई शुरू करने का फैसला किया है। 
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सोरेन सरकार ने ये दलीलें दी थीं
राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताते हुए खारिज करने का आग्रह किया गया था। सरकार ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने अपनी पहचान छिपाई है। याचिका दायर करने के पूर्व किस फोरम में प्रार्थी ने शिकायत की है इसका उल्लेख नहीं किया गया। वर्ष 2013 में इसी तरह की एक याचिका हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। इस याचिका में भी उन्हीं तथ्यों को उठाया गया है, इसलिए इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए। 

याचिकाकर्ता ने कही यह बात
सरकार की आपत्तियों पर प्रार्थी शिवशंकर शर्मा की ओर से कहा गया कि उसने अपनी पहचान अदालत में शपथपत्र के माध्यम से बताई है। जो भी आरोप लगाए गए हैं उसके दस्तावेज भी पेश किए गए हैं। इस कारण याचिका सुनवाई योग्य है।


सीलबंद लिफाफे को सरकार ने चुनौती दी थी
दरअसल, इन फर्जी खनन कंपनियों को लेकर 17 मई को झारखंड हाईकोर्ट ने एक आदेश दिया था। मामले में ईडी ने एक सीलबंद लिफाफा झारखंड हाईकोर्ट को सौंपा था। याचिका स्वीकार या खारिज होने के पूर्व ईडी के इस कदम को झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका की स्वीकार्यता को लेकर हाईकोर्ट को जांच का निर्देश दिया था। 
 
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