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Jharkhand: ‘भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी’, इस मामले में HC ने दिया आदेश

Thu, 04 Apr 2024 04:03 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 04 Apr 2024 04:03 AM IST
सार

दरअसल, पिछले साल 11 अप्रैल को भाजपा नेताओं ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया था। मामले में धुर्वा पुलिस थाने में झारखंड भाजपा नेताओं के खिलाफ निषेधाज्ञता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था।

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Jharkhand HC orders no coercive step be taken against BJP leaders over march to secretariat
Jharkhand High Court - फोटो : Social Media

विस्तार

झारखंड उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को आदेश देते हुए कहा कि भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। दरअसल, पिछले साल 11 अप्रैल को भाजपा नेताओं ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया था। मामले में धुर्वा पुलिस थाने में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे, रांची के सांसद संजय सेठ और पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास सहित झारखंड भाजपा नेताओं के खिलाफ निषेधाज्ञता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था।

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मामले में अदालत ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। इस मामले में दोबारा आठ मई को अगली सुनवाई की जाएगी। 

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पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज किया था
सचिवालय की ओर मार्च कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ झड़प हो गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सचिवालय की ओर मार्च करने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, पानी की बौछारें कीं और लाठीचार्ज किया था। तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश ने कहा था कि हम झारखंड में इस भ्रष्ट सरकार को नहीं चलने देंगे। हमने उन्हें बाहर निकलने का रास्ता दिखाने का संकल्प लिया है। पुलिस लाठीचार्ज में हमारे कई कार्यकर्ता घायल हो गए।" प्रकाश ने दावा किया कि राज्य भर के भगवा पार्टी के कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन ने झारखंड सरकार में 'भय की भावना पैदा की है' और मुख्यमंत्री 'डर के कारण' रांची छोड़कर चले गए हैं। 

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मांस की अनधिकृत दुकानों के खिलाफ कार्रवाई पर रिपोर्ट सौंपें पुलिस अधीक्षक: झारखंड उच्च न्यायालय
वहीं, एक अन्य मामले में न्यायालय ने बुधवार को राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को उनके अधिकार क्षेत्र में चल रहीं मांस की अनधिकृत दुकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की अदालत ने श्यामानंद पांडे नामक एक व्यक्ति की ओर से दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। पांडे ने अपनी याचिका में खुले में मांस की बिक्री का मुद्दा उठाया था।

पांडे ने कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के विशिष्ट निर्देशों के बावजूद, राज्य में हर जगह मांस की अवैध दुकानें चल रही हैं। पांडे ने अपनी याचिका में कहा कि नगर निगम के नियमों का घोर उल्लंघन करते हुए राजधानी में सड़कों पर मृत जानवरों के शवों को खुले में लटका दिया जाता है। दुकानें बिना लाइसेंस के सड़क किनारे खुलेआम संचालित होती हैं। रांची नगर निगम द्वारा अदालत को बताया गया कि मांस की अवैध दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत को सूचित किया कि हालांकि, कांके में एक बूचड़खाना चालू किया गया है, लेकिन बहुत कम मांस विक्रेता कटाई के लिए वहां जानवरों को ले जाते हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।

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