कौन हैं आजसू चीफ सुदेश महतो, जिन्होंने ठुकराया था लालू के मंत्री पद का ऑफर
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झारखंड विधानसभा चुनाव परिणाम के ताझा रुझानों में ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन के प्रमुख सुदेश महतो किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। रघुवर सरकार में भाजपा के साथी रहे सुदेश महतो इस चुनाव में अलग चुनाव लड़े थे। रुझानों में उनकी पार्टी आजसू को सात सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं।
सुदेश महतो के राजनीति की शुरुआत पृथक झारखंड आंदोलन से हुआ। इस आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी के चलते स्थानीय लोगों के बीच उनकी पैठ गहरी हो गई। इन्होंने अपनी राजनीति के शुरुआती चरण में ही झारखंड की ऐतिहासिक पहचान कायम रखने की पहल की थी। महतो ने राज्य के निवासियों के साथ आत्मीय लगाव मजबूत करने के लिए बिरसा मुंडा और कोयलांचल के सामाजिक कार्यकर्ता व झारखंड आंदोलन के नेता स्वर्गीय बिपिन बिहारी महतो की प्रतिमाएं स्थापित करने की शुरुआत की थी।
आजसू चीफ सुदेश महतो झारखंड के उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इन्होंने झारखंड के गठन के साल 2000 में 25 साल की उम्र में अपना पहला चुनाव लड़ जीत हासिल की थी। इसके बाद बनी सरकार में सुदेश को सड़क निर्माण मंत्री बनाया गया। 29 दिसंबर 2009 को देश महतो ने झारखंड राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की कमान संभाली थी।
सुदेश महतो सिल्ली विधानसभा सीट से 2000, 2005 और 2009 में चुनाव जीत चुके हैं। इस बार भी वह सिल्ली विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ रहे हैं।
झारखंड मुक्ति मोर्चा का यूथ विंग था आजसू, बाद में तोड़ा नाता
80 के दशक में जब राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड राज्य गठन के बारे में पहली बार विचार सामने आया तब ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन की तर्ज पर आजसू को झारखंड मुक्ति मोर्चा के यूथ विंग के तौर पर 22 जून 1986 को स्थापित किया गया। झारखंड राज्य की मांग ने आजसू को एक राज्यस्तरीय पार्टी के रूप में पहचान दी।
आजसू ने झामुमो से तोड़ा नाता
अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर इनकी प्रतिबद्धता इतनी ज्यादा थी कि इन्होंने 1989 के लोकसभा चुनावों के बहिष्कार करने का फैसला किया। इसके लिए बिहार में हड़ताल और बंद का आह्वान किया गया। शिबू सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आजसू का इस बहिष्कार का समर्थन नहीं किया। यहीं से आजसू ने अपनी राजनीति को झामुमो से अलग कर लिया।
आजसू की मांग और व्यापक जनसमर्थन के आगे झुकते हुए 1995 में बिहार सरकार ने झारखंड एरिया ऑटोनोमस काउंसिल का गठन कर दिया। 90 सदस्यों वाली इस काउंसिल में झामुमो के 41 जबकि जनता दल 31 सदस्य थे। आजसू ने इसका भी बायकॉट किया। उसने पूर्ण राज्य के लिए अपने आंदोलन को और तेज कर दिया।
जींस टीशर्ट पहनने वाले सुदेश महतो पहली बार बने विधायक
1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनते ही झारखंड को अलग राज्य बनाने की कवायद शुरू कर दी गई। 2000 में झारखंड एक अलग राज्य बन गया। सुदेश महतो पहली बार सिल्ली से विधायक बने। सूत्रों के अनुसार, झारखंड में हुए पहले चुनाव में लालू लालू प्रसाद यादव ने अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए सुदेश महतो से समर्थन के बदले मंत्री पद देने का वादा किया था पर उन्होंने इनकार कर दिया।
महतो ने बाबूलाल मरांडी की सरकार को समर्थन दिया और बदले में उन्हें मंत्री पद मिला। इसके बाद वह आजसू के अध्यक्ष भी बने।