{"_id":"575fb5154f1c1bc54d11be31","slug":"jee-topper-gets-bmw-from-rajasthan-coaching-institute","type":"story","status":"publish","title_hn":"IIT-JEE में मिला 11वां रैंक तो इंस्टीट्यूट ने गिफ्ट की बीएमडब्ल्यू ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
IIT-JEE में मिला 11वां रैंक तो इंस्टीट्यूट ने गिफ्ट की बीएमडब्ल्यू
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 14 Jun 2016 01:54 PM IST
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राजस्थान के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक ने अपने छात्र को आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में सफलता पर खुश होकर बीएमडब्ल्यू कार गिफ्ट में दे दी। इस कार की कीमत 28 लाख रुपये है। कार पाने वाले छात्र का नाम तन्मय है।
तन्मय ने बताया कि वो समपर्ण इंस्टीट्यूट में आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी करता था। इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. आरएल पूनिया ने कहा था कि जो आईआईटी-जेईई में टॉप-20 में रैंक लाएगा। उसे वे अपनी बीएमडब्ल्यू कार देंगे। उन्होंने अपना वादा निभाया।
तन्मय ने आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में 11वां पायदान हासिल किया है। हालांकि तन्मय का कहना है कि वह यह कार लेने का इच्छुक नहीं है। क्योंकि जिसकी शिक्षा की बदौलत उसने जेईई में यह उपलब्धि हासिल की है, उस गुरू से कुछ लेने की बजाय दक्षिणा के तौर पर कुछ देना ज्यादा बेहतर होगा।
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तन्मय की इच्छा आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस विषय में पढ़ाई करने की है। उसके पिता सरकारी स्कूल में जीवविज्ञान के अध्यापक हैं। तन्मय के परिवार के पास कोई वाहन नहीं था। परिवार का कहना है कि अब वह गाड़ी चलाना सीखेगा।
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तन्मय ने बताया कि वो समपर्ण इंस्टीट्यूट में आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी करता था। इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. आरएल पूनिया ने कहा था कि जो आईआईटी-जेईई में टॉप-20 में रैंक लाएगा। उसे वे अपनी बीएमडब्ल्यू कार देंगे। उन्होंने अपना वादा निभाया।
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तन्मय ने आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में 11वां पायदान हासिल किया है। हालांकि तन्मय का कहना है कि वह यह कार लेने का इच्छुक नहीं है। क्योंकि जिसकी शिक्षा की बदौलत उसने जेईई में यह उपलब्धि हासिल की है, उस गुरू से कुछ लेने की बजाय दक्षिणा के तौर पर कुछ देना ज्यादा बेहतर होगा।
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तन्मय की इच्छा आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस विषय में पढ़ाई करने की है। उसके पिता सरकारी स्कूल में जीवविज्ञान के अध्यापक हैं। तन्मय के परिवार के पास कोई वाहन नहीं था। परिवार का कहना है कि अब वह गाड़ी चलाना सीखेगा।