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Jayalalithaa Death Probe: जयललिता की संदिग्ध मौत, अरुमुघस्वामी आयोग ने सौंपी रिपोर्ट

Sat, 27 Aug 2022 01:52 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 27 Aug 2022 01:52 PM IST
सार

राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपने के बाद पत्रकारों से चर्चा में जस्टिस अरुमुघस्वामी ने कहा कि लगभग 150 गवाहों को सुनने के बाद अंग्रेजी में 500 पृष्ठों और तमिल में करीब  600 पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्रकाशित करने का फैसला तमिलनाडु सरकार ही कर सकती है।

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Jayalalithaa death probe report submitted to Tamilnadu govt
जयललिता - फोटो : facebook

विस्तार

तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की मौत से जुड़ी 500 पृष्ठों की जांच रिपोर्ट शनिवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को सौंप दी गई। यह रिपोर्ट सेवानिवृत्त जस्टिस अरुमुघस्वामी ने सीएम स्टालिन को सौंपी है। इसे 13 महीने में तैयार किया गया है। अरुमुघस्वामी को जयललिता की मौत की जांच के लिए नियुक्त किया गया था। रिपोर्ट को लेकर अभी कोई खुलासा नहीं किया गया है। 

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राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपने के बाद पत्रकारों से चर्चा में जस्टिस अरुमुघस्वामी ने कहा कि लगभग 150 गवाहों को सुनने के बाद अंग्रेजी में 500 पृष्ठों और तमिल में करीब 600 पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्रकाशित करने का फैसला तमिलनाडु सरकार ही कर सकती है। इसमें  सभी संबंधित पहलुओं का उल्लेख किया गया है। उनके लिए यह जांच संतोषजनक रही। 
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कई लोगों ने महसूस किया कि आयोग ने एक अदालत की तरह काम किया। आयोग के समक्ष बयान देने वालों में अन्नाद्रमुक के शीर्ष नेता ओ. पनीरसेल्वम, जयललिता की भतीजी दीपा और भतीजे दीपक, शीर्ष अधिकारी और अन्नाद्रमुक के सी विजयभास्कर (पूर्व स्वास्थ्य मंत्री), एम थंबी दुरई, सी पोन्नईयन और मनोज पांडियन शामिल थे। उन्होंने कहा, अपोलो अस्पताल और शशिकला ने जांच में अच्छा सहयोग किया है। अब इसे सार्वजनिक करने का फैसला सरकार को करना है।
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अरुमुघस्वामी ने आगे कहा, सबसे पहले मैं आयोग पर भरोसा जताने और मुझे आगे बढ़ने की इजाजत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करता हूं। दूसरा, मैं राज्य सरकार को धन्यवाद देता हूं। क्योंकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा कि उसे आयोग पर भरोसा है। मेरी ओर से कोई देरी नहीं हुई है। मैंने अपना काम 13 महीने के अंदर किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले साल (30 नवंबर 2021) दिल्ली एम्स के छह डॉक्टरों का एक पैनल तैयार किया गया था। यह समिति जस्टिस अरुमुगास्वामी कमीशन की सहायता के लिए बनाया गया था।

जयललिता की मौत 5 दिसंबर 2016 को हुई थी। इसके आठ महीनों बाद तमिलनाडु के तत्कालीन सीएम पलानीस्वामी ने जांच के आदेश दिए थे। जयललिता के चेन्नई स्थित घर पोएस गार्डन को मेमोरियल में तब्दील किया गया है। एआईएडीएमके की पूर्व सुप्रीमो जयललिता (68) का 75 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद निधन हो गया था। 


जयललिता की सहयोगी रहीं पूर्व सांसद शशिकला पुष्पा ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर कर जयललिता के निधन की सीबीआई जांच करने की मांग की थी। हालांकि, शीर्ष कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। मीडिया रिपार्टों में कहा गया था कि जयललिता की मौत संदिग्ध हालत में हुई थी। अंतिम संस्कार की तस्वीर देखने से पता चलता है कि उनके शरीर पर निशान थे।
 

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