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जाट आंदोलन ने पकड़ी आग, आंदोलनकारी दिल्ली की ओर

Thu, 02 Mar 2017 01:17 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Mar 2017 01:17 PM IST
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Jat movement caught fire, agitating to Delhi
जाट आंदोलन
सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे से आरक्षण की मांग कर रहे हरियाणा के जाट गुरुवार को दिल्ली में जुटेंगे। आरक्षण के लिए जाटों ने पिछले साल हरियाणा में आक्रामक आंदोलन चलाया था। लेकिन इस साल उनकी रणनीति कुछ बदली हुई है।
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हरियाणा के कई शहरों में जाट पिछले कुछ दिनों से शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वो बिजली-पानी के बिल और सरकार से मिले कर्ज की किश्तें न भरकर असहयोग आंदोलन भी चला रहे हैं। दिल्ली कूच के सवाल पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता यशपाल मलिक ने कहा, ''33 दिन से 10 लाख से ज़्यादा लोग धरने पर बैठे हैं।
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जब उससे कोई हल नहीं निकला तो हमें मजबूरन दिल्ली में प्रदर्शन कर घेराव की रणनीति घोषित करनी पड़ी।'' यशपाल मलिक ने कहा कि 20 मार्च को 50 लाख लोगों के दिल्ली आने की संभावना है। ये सभी लोग अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली और खाने-पीने का इंतजाम करके आएंगे।
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Jat movement caught fire, agitating to Delhi
जाट आंदोलन
इसी से केंद्र सरकार की आंख खुलेगी। वो कहते हैं,'' जब दिल्ली में लाखों जाट अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर जुटेंगे तभी केंद्र सरकार को अहसास होगा कि हरियाणा में जाटों के साथ हो रहे अन्याय पर कुछ कदम उठाए, क्योंकि प्रदेश और केंद्र में एक ही पार्टी सरकार में है।''

राज्य में जाट आरक्षण का मामला अभी हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट में लंबित है। जाट आरक्षण पर हरियाणा की भाजपा सरकार के रवैये पर यशपाल मलिक सवाल उठाते हैं। वो कहते हैं, ''भाजपा ने हरियाणा में जाट और गैर जाट के बीच झगड़ा कराने का काम किया।''

पिछले साल आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में जाटों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। यशपाल मलिक की मांग है कि आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाए और जेलों में बंद जाटों को रिहा किया जाए। उनकी मांग है कि दंगों में मारे गए जाटों के परिवार वालों को नौकरी दी जाए और घायलों को मुआवजा मिले।

 
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