जापान ने कोरोना महामारी से लड़ने को भारत के लिए इमरजेंसी लोन बढ़ाया
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जापान ने कोरोना महामारी से लड़ने हेतु भारत के लिए इमरजेंसी लोन की सीमा को बढ़ा दिया है। जापान ने सोमवार को कहा कि उसने 50 अरब येन (करीब 34 अरब रुपये) का इमरजेंसी लोन बढ़ाया है। इस लोन पर सालाना 0.01 फीसदी का ब्याज लगेगा और यह 15 साल के लिए होगा।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव, सीएस महापात्रा और जापानी राजदूत सुजुकी सातोशी के बीच सोमवार को दिल्ली में कोविड-19 संकट से निपटने के लिए भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र कार्यक्रम ऋण के लिए येन ऋण के प्रावधान से संबंधित नोटों का आदान-प्रदान किया गया।
नोटों के आदान-प्रदान के बाद सीएस महापात्रा और जीका (जेआईसीए), नई दिल्ली के प्रमुख प्रतिनिधि काट्सुओ मात्सुमोतो ने इस कार्यक्रम के लिए ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।
जापानी दूतावास द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 'कोविड-19 संकट प्रतिक्रिया आपातकालीन सहायता ऋण' कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई के लिए आवश्यक धन प्रदान करता है। यह वित्तीय सहायता भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य और चिकित्सा नीति के कार्यान्वयन का समर्थन करेगी, साथ ही आईसीयू और संक्रमण की रोकथाम और प्रबंधन सुविधाओं से लैस अस्पतालों के विकास को बढ़ावा देगी।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि 'जापान सरकार का यह सहायक अनुदान भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रणाली को मजबूत करने हेतु चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए है। इससे कोविड-19 संक्रमण से पीड़ित गंभीर और अति गंभीर रोगियों के उपचार के लिए स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।
यह ऋण 15 वर्षों की ऋणमुक्ति अवधि के साथ चार वर्ष की रियायत-अवधि के साथ दी जाएगी, जिसपर प्रति वर्ष की ब्याज दर 0.01 प्रतिशत होगी। इसके अलावा, दोनों देशों ने जापान की आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) योजना के माध्यम से, "द इकोनॉमिक एंड सोशल डेवलपमेंट प्रोग्राम" के माध्यम से भारत को एक बिलियन येन (लगभग 70 करोड़ रुपये) की अनुदान राशि के लिए भी नोटों का आदान-प्रदान किया गया।
भारत और जापान का वर्ष 1958 से ही द्विपक्षीय विकास सहयोग का लंबा और फलदायी इतिहास रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग रणनीतिक साझेदारी में मजबूती और विकसित हुआ है।