Jammu-Kashmir: क्या सेना की भूमिका में आएगी CRPF, घाटी में 'राष्ट्रीय राइफल्स' के पैटर्न पर हो रही तैनाती
Jammu-Kashmir: मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ की लगभग 70-80 बटालियन तैनात हैं। इन्हें कई तरह की जिम्मेदारी प्रदान की गई है। कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा में ही करीब 40 कंपनियां तैनात हैं। राजौरी क्षेत्र में भी तीन बटालियन ड्यूटी पर हैं...
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जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशनों में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स 'आरआर' के जवानों की संख्या को एक चरणबद्ध तरीके से कम किया जा सकता है। केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ', जो लंबे समय से आतंकियों और माओवादियों के खिलाफ जारी अभियानों में बढ़ चढ़कर भाग ले रहा है, उसे 'आरआर' जैसी भूमिका में आगे लाए जाने पर विचार हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में तैनात सीआरपीएफ की बटालियनों को 'राष्ट्रीय राइफल्स' के पैटर्न पर 'एरिया ऑफ रिस्पांसिबिलिटी' (एओआर) यानी जिम्मेदारी का क्षेत्र तय करने के लिए कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि इस एक्सरसाइज के लिए श्रीनगर से कुछ बटालियनों को 'आरआर' की तैनाती वाले स्थानों पर भेजा जा रहा है। इस बदलाव का मकसद, सीआरपीएफ की मूल जिम्मेदारी यानी 'आंतरिक सुरक्षा ग्रिड' को मजबूती प्रदान करना है।
सीआरपीएफ को अतिरिक्त बटालियन के सृजन की जरूरत
मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ की लगभग 70-80 बटालियन तैनात हैं। इन्हें कई तरह की जिम्मेदारी प्रदान की गई है। कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा में ही करीब 40 कंपनियां तैनात हैं। राजौरी क्षेत्र में भी तीन बटालियन ड्यूटी पर हैं। सीआरपीएफ को आंतरिक सुरक्षा ग्रिड को मजबूती प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस बल ने आतंकियों एवं नक्सलियों के खिलाफ अभियान, कानून व्यवस्था, उत्तर-पूर्व के उग्रवाद प्रभावित कई हिस्सों में सफल टास्क और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारत की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए सीआरपीएफ को ही नामित किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है, जेएंडके में अगर सीआरपीएफ को 'आरआर' के स्थान पर लाया जाता है, तो वहां बल को अतिरिक्त बटालियन के सृजन की जरूरत पड़ेगी। इस संबंध में त्वरित निर्णय लिया जाना चाहिए। सीआरपीएफ को अन्य ड्यूटी की बजाए पूरी तरह से आंतरिक सुरक्षा की तरफ शिफ्ट करना होगा। अपनी नई जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए सीआरपीएफ को कम से कम आठ नई बटालियन खड़ी करनी होंगी।
बढ़ रही है आतंकियों के मारे जाने की संख्या
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ विभिन्न अभियानों में केंद्रीय सुरक्षा बलों को खासी सफलता मिल रही है। जेएंडके में लंबे समय से कश्मीर घाटी एवं दूसरे हिस्सों में 'राष्ट्रीय राइफल्स', सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस, ऑपरेशन कर रही हैं। इस साल जेएंडके में अभी तक चार आतंकी मारे गए हैं, जबकि गत वर्ष इसी अवधि के दौरान यह संख्या 20 रही थी। अगर पिछले वर्ष मारे गए कुल आतंकियों की संख्या देखें तो वह 187 थी। साल 2018 में 257, 2019 में 157, 2020 में 221 और 2021 में 180 आतंकी मारे गए थे। आतंकी घटनाओं में 2018 में 39, 2019 में 39, 2020 में 37, 2021 में 41 और 2022 में 31 नागरिक मारे गए थे। इसी तरह सुरक्षा कर्मियों की शहादत का आंकड़ा देखें, तो वह साल 2018 में 91, 2019 में 80, 2020 में 62, 2021 में 42 और 2022 में 31 रहा है। आतंकवाद रोधी अभियानों की संख्या 2018 में 100, 2019 में 74, 2020 में 100, 2021 में 95 और 2022 में 111 रही है।