Jammu Kashmir Target Killing: टारगेट किलिंग से नहीं आएगा 'गजवा-ए-हिंद', हिंदुओं को बाहर निकालने वाले 'गाजी' तो मारे ही जाएंगे
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में हो रही 'टारगेट किलिंग' की गूंज दिल्ली तक दस्तक दे रही है। जहां एक तरफ जम्मू-कश्मीर प्रशासन, सेना, पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारी बैठक कर रहे हैं, वहीं गुरुवार को दिल्ली में भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने घाटी के इस ज्वलंत मुद्दे पर बातचीत की है। 'टारगेट किलिंग' पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक एवं सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, पाकिस्तान का ये सपना है कि कश्मीर में 'टारगेट किलिंग' से 'गजवा-ए-हिंद' आ जाएगा। हिंदुओं को घाटी से बाहर निकालने की साजिश रची जा रही है। पहले सुरक्षा बलों पर हमले होते थे, लेकिन आतंकियों ने सामान्य लोगों, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। घाटी में केवल मुस्लिम रहें, ऐसा प्रयास करने वाले 'गाजी' तो मारे ही जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा टारगेट किलिंग का मामला
आतंकियों ने गुरुवार को कुलगाम में एक बैंक मैनेजर विजय की हत्या कर दी। विजय, मूल रूप से राजस्थान के हनुमानगढ़ के रहने वाले थे। वे अरेह मोहनपोरा स्थित 'इलाकी देहाती बैंक' में मैनेजर थे। आतंकियों ने मई के दौरान कश्मीर में सात हिंदुओं की हत्या कर दी है। 31 मई को कुलगाम में ही एक हिंदू अध्यापिका की हत्या की गई थी। घाटी से कुछ ऐसी खबरें भी आईं कि कश्मीरी पंडितों ने वहां से पलायन शुरू कर दिया है। वे सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस ने कश्मीरी पंडितों वाले इलाकों की सुरक्षा कड़ी कर दी है। मुख्य गेट पर ताला लगाने जैसे खबरें भी आ रही हैं। जम्मू कश्मीर में हिंदुओं की टारगेट किलिंग को लेकर वकील विनीत जिंदल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की गई है। कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग के मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानि एनआईए से जांच कराने की मांग की गई है।
'गजवा-ए-हिंद' का सपना तो कभी साकार नहीं होगा
जानकारों के मुताबिक, इस शब्द का मतलब इस्लाम को फैलाना है। इसके लिए जंग को जायज बताया गया है। इस्लामिक राज्य की स्थापना के लिए जो भी लोग इस जंग में शिरकत करते हैं या अन्य तरीके से मदद देते हैं, वे 'गाजी' कहलाते हैं। हालांकि इस्लामिक लड़ाकों को 'गाजी' कह कर बुलाया जाता है। कश्मीर में भी आजकल बहुत से लोगों को यह वहम हो चला है कि वे यहां पर 'गजवा-ए-हिंद' ले आएंगे। कुछ लोगों का कहना है कि 'गजवा-ए-हिंद' में केवल इस्लाम की स्थापना ही जरूरी नहीं होती, बल्कि वहां रहने वाले लोगों को भी मुसलमान बनाया जाता है। इस साल फरवरी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक ट्वीट में लिखा था, 'गजवा-ए-हिंद' का सपना कयामत तक साकार नहीं होगा। वहीं गुरुवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, बैंक मैनेजर, टीचर और कई मासूम लोग रोज मारे जा रहे हैं, कश्मीरी पंडित पलायन कर रहे हैं। जिनको इनकी सुरक्षा करनी है, उन्हें फिल्म के प्रमोशन से फुर्सत नहीं है। भाजपा ने कश्मीर को सिर्फ अपनी सत्ता की सीढ़ी बनाया है। कश्मीर में अमन कायम करने के लिए तुरंत कदम उठाइए, प्रधानमंत्री जी।
घाटी में जो 'गाजी' की मदद कर रहे हैं, लेकिन वे बचेंगे नहीं ...
कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) ने बताया, घाटी में बड़े स्तर पर गाजी मौजूद हैं। गाजी, केवल आतंकी ही नहीं हैं, बल्कि उनकी मदद करने वाले भी इसी श्रेणी में आते हैं। पाकिस्तान और उसकी आईएसआई, ऐसे ही प्रयासों में लगी है। ये अलग बात है कि हर बार उसे मुंह की खानी पड़ती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के पास पहुंचकर भारत के खिलाफ जगह उगल रहे हैं। वहां कश्मीर का मुद्दा उठा रहे हैं। एर्दोगन ने भी यह कहते हुए देर नहीं लगाई कि कश्मीर मुद्दे का हल संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों के मुताबिक हो। इससे साफ हो गया है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को कभी नहीं छोड़ेगा। कश्मीर ही पाकिस्तानी सियासत का केंद्र बिंदू है। घाटी में इस वक्त आतंकी, सुरक्षा बलों के सामने नहीं आ रहे। वे जानते हैं कि वहां से उनका बचना मुश्किल है। यही वजह है कि वे अब 'अंडर ग्राउंड वर्कर' व 'ओवर ग्राउंड वर्कर' की मदद ले रहे हैं। जम्मू कश्मीर में पुलिस को आतंकियों के छिपने की सूचना सही समय पर नहीं मिलती। वजह, वहां एक समुदाय विशेष के लोग उनका समर्थन एवं सहयोग करते हैं। पिछली सरकारों ने 'जमात ए इस्लामिया' जैसे कैडर से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरी में भर दिया था। इसका खामियाजा, आज सुरक्षा बलों को भुगतना पड़ रहा है। कई सरकारी विभागों में छिपे आतंकियों के मददगारों को ढूंढ कर उन्हें नौकरी से बाहर किया जा रहा है।
टारगेट किलिंग का मतलब 'हिंदू को बाहर भगाओ'
पिछले कुछ समय से घाटी में टारगेट किलिंग हो रही है। अधिकांश आतंकी भी कश्मीर में ही मारे जा रहे हैं। मई के दौरान कश्मीर में 27 आतंकी मारे गए हैं। बतौर कैप्टन गौर, पाकिस्तान के इशारे पर अब घाटी में टारगेट किलिंग हो रही हैं। इनका मकसद है कि किसी भी तरह से हिंदुओं को बाहर निकाल दिया जाए। उनमें ऐसा खौफ पैदा कर दें कि वे जल्द से जल्द कश्मीर से जाने पर मजबूर हों। मुस्लिम चाहते हैं कि कश्मीर में कोई बाहर का व्यक्ति न बसे। उनके अलावा कोई दूसरा व्यक्ति यहां कारोबार व नौकरी न करे। विकास कार्यों के टेंडर भी बाहर वाला न ले। कश्मीर से बाहर का व्यक्ति यहां जमीन न खरीदे। यही वजह है कि ये लोग, टारगेट किलिंग वाले आतंकियों की सूचना पुलिस को नहीं दे रहे। टारगेट किलिंग, भीड़ वाले स्थानों पर हो रही हैं, हमलावर आसानी से भाग जाता है। वहां पर लोग होते हैं, लेकिन वे कुछ बताते नहीं। ऐसा तो है नहीं कि वहां से सीधा रास्ता जंगल को जाता है। किलर, आबादी के बीच से ही आता है और वहीं से बाहर जाता है। खैर ये लोग कितना ही प्रयास कर लें, लेकिन 'गजवा-ए-हिंद' कभी नहीं आएगा। देर सवेर, सुरक्षा बल, इन काली भेड़ों को बाहर निकाल कर खत्म कर देंगे।