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बिना मुकदमे दो साल तक नजरबंद रखने का प्रावधान, जानें क्या है जन सुरक्षा कानून 

Thu, 06 Feb 2020 10:29 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Thu, 06 Feb 2020 10:29 PM IST
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Jammu Kashmir News : What is Public Safety Act (PSA), Farooq, omar Abdullah, Mehbooba Mufti
omar abdullah and mehbooba mufti - फोटो : अमर उजाला
जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती व अन्य के खिलाफ जन सुरक्षा कानून (PSA) के तहत गुरुवार को मामला दर्ज कर किया गया। इस कानून के अनुसार, सार्वजनिक सुरक्षा के मद्देनजर किसी भी व्यक्ति को दो साल तक बिना मुकदमा गिरफ्तार किया जा सकता है। या फिर उसकी नजरबंदी की जा सकती है।
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कश्मीर के नेताओं के लिए सिरदर्द बन रहा यह कानून फारूक अब्दुल्ला के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने बनाया था। इस कानून को लकड़ी के तस्करों से निपटने के लिए लागू किया गया था। 
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इसलिए पड़ी जरूरत: 

जन सुरक्षा कानून 1970 के दशक में जम्मू-कश्मीर में लकड़ी की तस्करी एक बड़ी समस्या बनती जा रही थी। कड़ा कानून नहीं होने की वजह से अपराधी आसानी से छूट जाते थे। इसके समाधान के लिए शेख अब्दुल्ला इस कानून को लेकर आए। 
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90 के दशक में सुरक्षा बलों के काम आया

कश्मीर में 1990 के दौरान उग्रवाद चरम पर पहुंच गया था। इसे रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए यह कानून एक अहम हथियार बना। इसी दौरान तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने प्रदेश में विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को लागू किया। इसके बाद पीएसए के तहत कई लोगों को पकड़ने का भी काम किया गया। 
 

हाईकोर्ट में दी जा सकती है चुनौती 

इस कानून के तहत गिरफ्तार या नजरबंदी को लेकर एक समिति समय-समय पर समीक्षा करती है। इस कानून को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इसके तहत 16 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को बिना केस गिरफ्तार किया जा सकता था। 2011 में न्यूनतम आयु को बढ़ाकर 18 वर्ष कर दिया गया। 

पत्थरबाजों के खिलाफ कारगर कानून 

हालिया समय में इस कानून का इस्तेमाल आतंकियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों के खिलाफ किया जाता रहा है। 2016 में आतंकी बुरहान वानी की हत्या के बाद कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पीएसए के तहत 550 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।
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