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जम्मू-कश्मीर: राज्यपाल ने बुलाई बैठक, डीजीपी बोले- आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन और तेज होगा

Wed, 20 Jun 2018 11:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 20 Jun 2018 11:30 AM IST
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jammu kashmir After imposition of Governor rule in NN Vohra address to security forces Live Updates 
एसपी वैद - फोटो : ani

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खात्मे को चलाए जाने वाले आपरेशन आलआउट से राजनीति आउट हो चुकी है। अब सुरक्षाबल बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे। इसी संबंध में डीजीपी एस. पी. वैद ने बुधवार को एक चैनल से बातचीत में कहा कि आने वाले दिनों में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन और तेज होगा। आतंक फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। एसपी वैद ने यह भी कहा कि राज्यपाल के शासन में पुलिस को काम करने में काफी आसानी होगी। 

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उल्लेखनीय है कि जम्मू- कश्मीर में महबूबा मुफ्ती सरकार गिरने के बाद बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य में तत्काल प्रभाव से राज्यपाल शासन लागू करने को मंजूरी दे दी है। इससे पहले, भाजपा ने मंगलवार को मुफ्ती सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद महबूबा मुफ्ती ने अपना इस्तीफा राज्यपाल एनएन वोहरा को सौंप दिया। 
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 वहीं, दूसरी तरफ राज्यपाल एन एन वोहरा कुछ देर में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षाबलों को श्रीनगर में संबोधित करेंगे।

गौरतलब है कि कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पर राजनीति भारी पड़ रही थी। रमजान में एकतरफा सीजफायर करने का फैसला भारी पड़ा। आतंकी सेना और पुलिस पर हावी हो गए थे। जिसके बाद आपरेशन आलआउट फिर से जारी रखने के निर्देश दिए गए। सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस को चार दिन पहले ही बोल दिया गया था कि आतंकियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करें। इसमें कोई राजनीति हस्तक्षेप नहीं होगा। तीन दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एकतरफा सीजफायर को वापिस कर लिया। उसके अगले ही दिन सेना प्रमुख रियासत के दौरे पर पहुंच गए। आपरेशन आल आउट में कहीं न कहीं राजनीतिक हस्तक्षेप एक बड़ा रोड़ा बन गया था। 
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रक्षा विशेषज्ञों की भी राय है कि अब सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। एकतरफा सीजफायर का आखिर नतीजा क्या हुआ। 

आतंक का गढ़ बन गया था दक्षिण कश्मीर

पूर्व बिग्रेडियर और रक्षा विशेषज्ञ अनिल गुप्ता कश्मीर का दक्षिण इलाका पीडीपी और जमातिया इस्लाम का गढ़ है। यह इलाका पूरी तरह से आतंकवाद ग्रस्त है और आतंकी इसमें हावी हो गए थे। क्योंकि राजनीतिक हस्तक्षेप था। अब सेना और पुलिस पूरी तरह से आजाद हैं। वह आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। 

बिना राजनीति के होगी कार्रवाई
पूर्व कैप्टन और रक्षा विशेषज्ञ अनिल घौर का मानना है कि राजनीतिक हस्तक्षेप हमेशा ही सैन्य कार्रवाई को प्रभावित करता है। निश्चित तौर पर अब सेना और पुलिस अधिक मजबूती से काम करेगी और इसका नतीजा भी सामने आएगा। उम्मीद है कि घाटी में आतंकियों का खात्मा होगा। 

राज्यपाल पर निर्भर करेगा
पूर्व डीजीपी एमएम खजुरिया ने कहा कि यह देखना होगा कि राज्यपाल आतंकवाद को लेकर किसी तरह का रुख अपनाते हैं। किस तरह से काम होता है। आतंकियों के खिलाफ क्या रणनीति है। यह देखना होगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के हमेशा ही सेना की कार्रवाई कारागार साबित होती है।

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