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Jammu and Kashmir: पड़ोसी मुल्क से आने वाले आतंकियों की नई चाल, घुसपैठ सफल हुई तो ड्रोन से मिलेंगे हथियार
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Prayagraj News : Terrorist
- फोटो :
प्रयागराज
विस्तार
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' ने जम्मू-कश्मीर में सर्दियों के दौरान बर्फबारी और घने कोहरे में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नया प्लान तैयार किया है। सीमा पार के लांचिंग पैड पर करीब 170 आतंकी, लंबे समय से घुसपैठ करने का इंतजार कर रहे हैं।
कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, "आईएसआई ने पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के साथ मिलकर जो रणनीति बनाई है, उसके तहत बिना हथियार के आतंकियों की भारतीय सीमा में घुसपैठ कराई जा सकती है। चूंकि कश्मीर घाटी में अब लोकल आतंकी दिन प्रतिदिन कम हो रहे हैं, इसलिए पाकिस्तानी मूल के आतंकियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में सीमा पार कराने का प्रयास हो रहा है।"
अधिकारी के मुताबिक, "ये आतंकी पशु चराने वाले के वेश में हो सकते हैं। अगर पकड़े जाते हैं तो ये कह सकते हैं कि उनका पशु सीमा पार आ गया था। उसे खोजते हुए वे भारतीय सीमा में आ गए हैं। सुरक्षा बल जब उनकी तलाशी लेंगे तो उन्हें ऐसा कुछ नहीं मिलेगा, जिससे कि उन पर शक हो। फ्लैग मीटिंग में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए आतंकियों को नकली वोटर कार्ड भी दिया जाएगा। अगर घुसपैठ का ये तरीका कामयाब रहता है तो आतंकियों के हथियार ड्रोन द्वारा पहुंचाने की कोशिश होगी।"
पाकिस्तानी सीमा में आतंकियों के दर्जन लांचिंग पैड
बता दें कि सर्दियों में नवंबर से लेकर अप्रैल तक पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को सीमा पार कराने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए पाकिस्तानी की सीमा में दर्जनों लांचिंग पैड तैयार किए गए हैं। आईएसआई ने कुपवाड़ा क्षेत्र में घुसपैठ कराने के लिए करीब दो दर्जन आतंकियों को तैयार किया है। इन आतंकियों को पाक अधिकृत कश्मीर के लीपा में स्थित लांचिंग पैड पर रखा गया है। अटमुकाम इलाके में भी आतंकी लांचिंग पैड बताए गए हैं।
केरन सेक्टर (जुमागिंड इलाका), दूध निहाल, पुंछ में कृष्णा घाटी और मेंढर सहित कई दूसरे क्षेत्रों में घुसपैठ कराने का प्रयास होता है। जब कश्मीर में भारी बर्फबारी होती है तो जम्मू क्षेत्र से घुसपैठ की ज्यादा कोशिश की जाती है। हालांकि अब पिछले कई वर्षों से देखने में आया है कि घने कोहरे और बर्फबारी में भी आतंकियों को भारतीय सीमा में धकेलने का प्रयास किया जाता है।
पाकिस्तान की सीमा में बालाकोट, चेलाबांडी, शावनाला, डुबली, दुलेई, गढ़ी हबीबुल्ला, कोटलीर, गुलपुर और फगोश में जो नए लांचिंग पैड स्थापित किए गए हैं, वहां पर अन्य ट्रेनिंग के अलावा आतंकियों को ड्रोन एवं हाइटेक कम्युनिकेशन का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आईएसआई और आतंकी संगठनों ने मिलकर शक्करगढ़ में एक बड़ा ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर एवं कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
ड्रोन को लेकर सतर्क है आर्मी और बीएसएफ
सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारी ने बताया, बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए तैनात बलों को सभी सूचनाओं से अवगत करा दिया गया है। पशु पालकों के वेश में अगर कोई पाकिस्तानी, भारतीय सीमा में पकड़ा जाता है तो उसकी पूरी गहराई के साथ जांच पड़ताल होगी। नकली वोटर आईडी को लेकर सुरक्षा बल सचेत हैं। उन्हें यह भी मालूम है कि अगर कोई निहत्था घुसपैठिया पकड़ा जाता है तो उससे कैसे निपटना है। ड्रोन को लेकर आर्मी और बीएसएफ सतर्क हैं।
जिन सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन से हथियार या ड्रग्स गिराए जा सकते हैं, वहां पर मैनुअली और इलेक्ट्रॉनिकली सर्विलांस रहेगा। 'मल्टी टियर सिक्योरिटी' सिस्टम के द्वारा घुसपैठ या ड्रोन पर नजर रखी जाएगी। सीमा पर धुंध में किसी भी उपकरण को पहचानने वाले उपकरण लगाए गए हैं। यह भी संभव है कि पाकिस्तान 'इनफिल्ट्रेशन बिड्स' यानी सीजफायर तोड़कर उसकी आड़ में आतंकियों को सीमा पार कराने की कोशिश करे, इस लेकर सुरक्षा बल पूरी तरह सचेत हैं।
राजौरी और पुंछ जिलों से लगती सीमा पर विशेष चौकसी बरती जा रही है। संदिग्ध वस्तु या घुसपैठिये पर नजर रखने के लिए यूएवी, मॉडर्न सेंसर सिस्टम, थर्मल इमेजर और नाईट विजन डिवाइस आदि का इस्तेमाल हो रहा है।