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जम्मू-कश्मीर: सीपीआई (एम) नेता यूसुफ ने कहा- हम चुनाव की तारीख नहीं, अलग राज्य का दर्जा मांगने गए थे

Sun, 27 Jun 2021 02:53 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 27 Jun 2021 02:53 AM IST
सार

  • सीपीआई एम नेता यूसुफ तारिगामी ने कहा, चुनाव से हमें इनकार नहीं, लेकिन घाटी की जनता की मांगों का क्या होगा?
  • तारिगामी ने कहा, हम उम्मीद के साथ दिल्ली आए थे, लेकिन अब लगता है कि देश को ही जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुध लेनी होगी

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Jammu and Kashmir issue CPI(M) leader Yusuf said We went to ask for separate statehood
युसूफ तारिगामी (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

सीपीआई एम नेता यूसुफ तारिगामी ने जम्मू-कश्मीर को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराते हुए शनिवार को कहा, हम पीएम मोदी की सर्वदलीय बैठक में चुनाव की तारीखें लेने नहीं गए थे। भारत के संविधान में हमारे लिए जो अधिकार तय किए गए थे, हम उनको बहाल करने की मांग लेकर गए थे। केंद्र ने हमसे ये अधिकार छीन लिए हैं।

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मोदी की सर्वदलीय बैठक के दो दिन बाद तारिगामी मीडिया के सामने आए और कहा, चुनाव से हमें इनकार नहीं है, लेकिन घाटी की जनता की मांगों का क्या होगा? हमें केंद्र की ओर से इसके लिए कोई आश्वासन नहीं मिला है। गृहमंत्री ने अपने भाषण में अलग राज्य का दर्जा देने की बात की थी।
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पीएम मोदी ने भी संसद के भीतर और बाहर यह बात दोहराई है, लेकिन अब तक इस दिशा में कुछ हुआ नहीं, आखिर कब ऐसा होगा? अगर हम राज्य के दर्जे के लिए इंतजार कर सकते हैं तो चुनाव के लिए भी इंतजार कर लेंगे। इसकी अभी क्या जरूरत है। तारिगामी ने कहा, हम उम्मीद के साथ दिल्ली आए थे मगर अफसोस की हमें खाली हाथ ही लौटना पड़ेगा। अब लगता है कि देश को ही जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुध लेनी होगी और उनका भरोसा जीतने के लिए उचित कदम उठाना होगा।
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जम्मू-कश्मीर को लेकर 15 पूर्व आईपीएस अफसरों ने की मोदी सरकार की तारीफ  
देश के 15 पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने एक खुला पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के साहसी एवं निर्णायक प्रयासों की तारीफ की है।  साथ ही कश्मीर को लेकर घाटी के नेताओं के साथ बातचीत वाले केंद्र सरकार की पहल को अनुकरणीय बताया।


पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 15 में से दस आईपीएस अधिकारी राज्य के डीजीपी रह चुके हैं। इन्होंने कहा, कश्मीर का भारत में विलय 1950 में संविधान लागू होने के वक्त से अब तक बहुप्रतीक्षित मसला था। मोदी सरकार ने इसे मूर्तरूप देकर बड़ा काम किया है। उन्होंने कहा, मोदी सरकार जब से सत्ता में आई तब से ही इस मुद्दे पर उसके कठिन, साहसी और निर्णायक प्रयास जारी हैं। यह राष्ट्रीय गौरव की बात है कि केंद्र सरकार ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास किये और अंत में कश्मीर को पूरे देश में अंगीकृत किया।

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