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जल्लीकट्टू: तमिलनाडु ने कहा, यह गलत धारणा कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता
Wed, 07 Dec 2022 12:29 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 07 Dec 2022 12:29 AM IST
सार
संविधान पीठ को तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक खेल आयोजन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो सकता है और जल्लीकट्टू में सांडों पर कोई क्रूरता नहीं की जाती।
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जल्लीकट्टू(सांकेतिक तस्वीर)
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विस्तार
तमिलनाडु सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में राज्य में सांडों को काबू में करने वाले खेल ‘जल्लीकट्टू’ की अनुमति देने वाले कानून का बचाव करते हुए कहा कि यह एक ‘गलत धारणा’ है कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता।
जल्लीकट्टू को ‘एरुथाझुवुथल’ के रूप में भी जाना जाता है। इसका आयोजन तमिलनाडु में पोंगल फसल उत्सव के उपलक्ष्य में किया जाता है। तमिलनाडु सरकार ने पिछले महीने शीर्ष अदालत में दायर अपनी लिखित दलीलों में कहा है कि जल्लीकट्टू एक धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार है, जिसका राज्य के लोगों के लिए धार्मिक महत्व है और यह पशु क्रूरता रोकथाम (पीसीए) अधिनियम, 1960 के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता।
मंगलवार को दलीलों के दौरान, न्यायमूर्ति के एम जोसेफ के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक खेल आयोजन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो सकता है और जल्लीकट्टू में सांडों पर कोई क्रूरता नहीं की जाती।
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द्विवेदी ने कहा कि यह एक गलत धारणा है कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ‘जल्लीकट्टू’ और बैलगाड़ी दौड़ की अनुमति देने वाले तमिलनाडु और महाराष्ट्र के कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। मंगलवार को दिन भर चली सुनवाई के दौरान, केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि वह महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कानूनों का पूरा समर्थन करते हैं।
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जल्लीकट्टू को ‘एरुथाझुवुथल’ के रूप में भी जाना जाता है। इसका आयोजन तमिलनाडु में पोंगल फसल उत्सव के उपलक्ष्य में किया जाता है। तमिलनाडु सरकार ने पिछले महीने शीर्ष अदालत में दायर अपनी लिखित दलीलों में कहा है कि जल्लीकट्टू एक धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार है, जिसका राज्य के लोगों के लिए धार्मिक महत्व है और यह पशु क्रूरता रोकथाम (पीसीए) अधिनियम, 1960 के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता।
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मंगलवार को दलीलों के दौरान, न्यायमूर्ति के एम जोसेफ के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक खेल आयोजन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो सकता है और जल्लीकट्टू में सांडों पर कोई क्रूरता नहीं की जाती।
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द्विवेदी ने कहा कि यह एक गलत धारणा है कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ‘जल्लीकट्टू’ और बैलगाड़ी दौड़ की अनुमति देने वाले तमिलनाडु और महाराष्ट्र के कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। मंगलवार को दिन भर चली सुनवाई के दौरान, केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि वह महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कानूनों का पूरा समर्थन करते हैं।