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कब तक बुझेगी प्यासा: देश के सभी घरों में पानी पहुंचाने की रफ्तार पड़ी धीमी, 365 दिनों में मात्र लगे 1.9 करोड़ नल कनेक्शन

Sat, 23 Apr 2022 07:45 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 23 Apr 2022 07:45 PM IST
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सार
जल जीवन मिशन के आंकड़ों का विश्लेषण से सामने आता है कि देश के बड़े राज्य ही सरकार के लक्ष्य को धीमा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने 2021-22 में 650,384 कनेक्शन लगाए। राजस्थान ने 501,462 परिवारों को कवर किया (जबकि लक्ष्य 30 लाख का था)। केरल ने 29 लाख के अपने लक्ष्य के मुकाबले 622,942 घरों को कवर किया...
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Jal Jeevan Mission data reveals that big states like UP, Rajasthan and MP slowing down the government target
जल जीवन मिशन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल जल जीवन मिशन की रफ्तार फिलहाल थमी हुई नजर आ रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) की तुलना में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत पाइप के जरिए पानी का कनेक्शन देने की रफ्तार में काफी तेजी आई है। हालांकि इस वित्त वर्ष में यह रफ्तार धीमी हो गई है। मोदी सरकार ने पिछले दो वर्षों तो अपना समुचित लक्ष्य हासिल किया, लेकिन इस साल इसके अपने लक्ष्य में 60 फीसदी तक की कमी आने की संभावना है। जल शक्ति मंत्रालय ने परिकल्पना की थी कि वह गत वित्त वर्ष में 4.9 करोड़ परिवारों को पाइप वाले पानी का कनेक्शन देने में सक्षम होगी, लेकिन 24 मार्च तक यह केवल 1.98 करोड़ घरों को कवर करने में सक्षम थी।

लग सकते हैं और पांच साल

इस तरह के प्रदर्शन को मिलाकर देखा जाए तब सरकार ने 6.56 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 2020-21 तक 7.29 करोड़ परिवारों को कवर किया था और इस साल यह 1.04 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 9.2 करोड़ परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान करने में सक्षम होगी। उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अगर सरकार यही रफ्तार बरकरार रखती है, तो देश के सभी घरों तक पाइप वाले पानी का कनेक्शन देने की 2024 की तय समय सीमा को पार कर जाएगी। ऐसी स्थिति में भारत के सभी घरों को नल कनेक्शन देने में पांच साल का वक्त और लग सकता है।



जेजेएम के आंकड़ों का विश्लेषण से सामने आता है कि देश के बड़े राज्य ही सरकार के लक्ष्य को धीमा कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश 2021-22 के लिए अपने लक्ष्य का केवल 8.3 फीसदी ही कवर करने में सक्षम था और इसने 78 लाख के अपने लक्ष्य की तुलना में 650,384 कनेक्शन लगाए। राजस्थान ने 501,462 परिवारों को कवर किया (जबकि लक्ष्य 30 लाख का था)। केरल ने 29 लाख के अपने लक्ष्य के मुकाबले 622,942 घरों को कवर किया।

छह राज्यों ने सभी परिवारों को दिया नल कनेक्शन

रोजाना लगाए जाने वाले पाइप कनेक्शन के मामले में पंजाब बड़े सूबों के बीच सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य साबित हुआ है। जहां प्रत्येक 10 लाख लोगों के घरों पर औसतन 694 कनेक्शन थे। असम में प्रत्येक 10 लाख परिवारों पर औसतन 678 पानी के कनेक्शन थे। वहीं उत्तर प्रदेश में 2021-22 में प्रत्येक 10 लाख परिवारों पर पानी का 68 कनेक्शन, जबकि इसी लिहाज से राजस्थान में 133 और झारखंड में 193 पानी का कनेक्शन भी शामिल हैं। देश ने 24 मार्च तक 48 फीसदी परिवारों को कवर किया है। वहीं पांच राज्यों, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर प्रदेश ने एक-चौथाई से भी कम कवर किया था। वहीं छह राज्य सभी परिवारों को नल का कनेक्शन देने में सफल रहे थे।

संसद की एक स्थायी समिति की रिपोर्ट से पता चलता है कि भले ही पेयजल और स्वच्छता विभाग ने 91,258 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन इसे वर्ष 2022-23 के लिए 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। जेजेएम 2021-22 में मुश्किल से आधे लक्ष्य को कवर कर सका। वहीं 50,000 करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले, सरकार ने जनवरी 2022 तक 28,238 करोड़ रुपये खर्च किए थे। ऐसे में वर्ष 2022-23 के लक्ष्यों को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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