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'उत्तराखंड में असंवैधानिक थी रावत सरकार'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 27 Mar 2016 10:11 PM IST
सार
- राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को ठहराया न्यायसंगत
- वित्त मंत्री ने कहा, प्रदेश शासन की नाकामी का सटीक उदाहरण
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अरुण जेटली
- फोटो : PTI
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विस्तार
केंद्र ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को न्यायसंगत ठहराया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हरीश रावत सरकार 18 मार्च को ‘असफल’ विनियोग विधेयक को पारित दर्शाए जाने के बाद से ही ‘असंवैधानिक’ और ‘अनैतिक’ हो गई थी।
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जेटली ने रविवार को कहा कि उत्तराखंड में राजनीतिक स्थिति ‘शासन की नाकामी का सटीक उदाहरण’ है। वित्तमंत्री ने साथ ही जोर देकर कहा कि ऐसी स्थिति में संविधान केंद्र को ‘कई विकल्प’ मुहैया कराता है। जेटली ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के संदर्भ में वे आधार बताए जो इस कांग्रेस शासित राज्य में संवैधानिक अव्यवस्था को स्पष्ट करते हैं।
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उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के 68 वर्ष में, इस तरह की घटना नहीं हुई। मुझे नहीं लगता कि भारत की संसदीय प्रणाली को इससे ज्यादा बड़ी क्षति हुई हो। उन्होंने कहा कि विधानसभा में स्पीकर ने 18 मार्च को उस समय विनियोग विधेयक पारित घोषित किया था जब 67 में से 35 विधायकों ने उन्हें पहले से लिखकर दे दिया था कि वे इसके खिलाफ मत देंगे।
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इन विधायकों ने सदन के पटल पर मतविभाजन पर जोर दिया था लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे ध्वनिमत से पारित घोषित किया था जबकि वास्तव में 67 में से केवल 32 उपस्थित सदस्यों ने इसका समर्थन किया था। 71 सदस्यों के सदन में तीन अनुपस्थित थे।