अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार उठा रही कड़े कदम: अरुण जेटली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन इसके लिए चिंतित होने की जरूरत नहीं है। वित्त मंत्री ने मुंबई में शुक्रवार को ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम को संबोधित किया।
जेटली ब्लूमबर्ग इंडिया इकनॉमिक फोरम में आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम के बारे में बता रहे थे। जेटली ने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल वैश्विक कारणों के बावजूद अर्थव्यवस्था पटरी पर है।
जेटली ने कहा कि आप एक अर्थव्यवस्था में लगातार खर्च करते हैं। लगातार अपने बैंकों की मदद करते हैं और राजकोषीय समझदारी को बनाए रखने में किस प्रकार तालमेल बिठाते हैं यह महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि राजकोषीय समझदारी बनाए रखना सबसे चुनौतीपूर्ण है, जिसका हम सामना कर रहे हैं।
उन्होंने इस बात को दोहराया कि सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है। हालांकि उन्होंने बेलआउट पैकेज देने पर चुप्पी साध ली।
'जीएसटी लागू करना उम्मीद से अधिक सरल रहा '
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना शुरुआती चरण में उम्मीद से अधिक सरल रहा है। यह बात केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कही। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच शीर्ष पर फैसला लेने की प्रक्रिया काफी संस्थागत रही है और रोजमर्रा के मुद्दों से निपटने के लिए बनाई गई प्रणाली अच्छी तरह से काम कर रही है।
मुंबई में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की 70वीं सालाना आम बैठक में जेटली ने कहा कि वैकल्पिक कर प्रणाली को लागू करने के ये शुरुआती दिन हैं। अभी तक तो सबकुछ उम्मीद से अधिक सरल प्रतीत हो रही है। नेटवर्क में खुद ही आने वाले लोगों की संख्या अब धीरे-धीरे बढ़ते रहने की उम्मीद है।
भारत की आर्थिक विकास दर अप्रैल-जून तिमाही में 5.7 फीसदी रही, जो मोदी सरकार के तीन साल में सबसे कम है और यह लगातार दूसरी तिमाही है, जब भारत की विकास दर चीन से कम रही है। इस गिरावट का कारण यह है कि नोटबंदी का प्रभाव लंबे समय तक कायम रहा और जीएसटी लाॉन्च होने से पहले विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती आ गई।
जेटली ने हाल में विकास दर कम रहने के लिए जीएसटी से पहले वस्तुओं की डिस्टॉकिंग को जिम्मेदार ठहराया था और उम्मीद जताई थी कि आर्थिक विकास दर सात फीसदी रहेगी, क्योंकि विनिर्माण क्षेत्र ने निचला स्तर छू लिया है और इसमें आगे तेजी आने की उम्मीद है।