Video: ‘आपके मुंह में घी-शक्कर’, आखिर स्वीडन में क्यों बोले जयशंकर
एस जयशंकर की स्वीडन यात्रा विदेश मंत्री के रूप में उनकी पहली यात्रा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और स्वीडन राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष मना रहे हैं।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी विदेश नीति और बयानों को लेकर लगातार चर्चा में रहते हैं। आजकल वह स्वीडन की तीन दिवसीय यात्रा पर पहुंचे हैं। इस बीच, उन्होंने यहां भारतीय समुदाय के साथ बातचीत की। इस दौरान ‘भारतीय संस्कृति के वैश्वीकरण’ पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि आपके मुंह में घी-शक्कर, जिसके बाद सभी ठहाका लगाकर हंसने लगे। जयशंकर यूरोपीय संघ हिंद-प्रशांत मंत्रालय मंच की बैठक में भाग लेने के लिए स्वीडन की यात्रा पर आए हुए हैं।
एस जयशंकर की स्वीडन यात्रा विदेश मंत्री के रूप में उनकी पहली यात्रा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और स्वीडन राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष मना रहे हैं। स्वीडन वर्तमान में यूरोपीय संघ की परिषद की अध्यक्षता करता है। रविवार शाम को उन्होंने स्वीडन में मौजूद लोगों से भारत में चल रही विकास गतिविधियों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए पैदा किए गए अवसरों के बारे में बात की।
VIDEO | If you follow Hindi, there is a term which is 'aapke muh mein ghee shakkar (what you say, may it come true)...,' said EAM S Jaishankar while addressing the Indian diaspora in Sweden yesterday. pic.twitter.com/CcwJqI9o4e
विज्ञापन विज्ञापन— Press Trust of India (@PTI_News) May 15, 2023
क्या पानी पूरी खाना शुरू कर देंगे
जयशंकर से पूछा गया कि वैश्वीकरण के इस युग में, क्या पश्चिम हैमबर्गर के बजाय लोग 'पानी पूरी' खाना शुरू कर देंगे और क्या एच एंड एम टी-शर्ट पर न्यूयॉर्क के बजाय नई दिल्ली छपी होगी? इस प्रश्न का उन्होंने बड़े ही अलग अंदाज में उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि मैं नहीं जानता कि आपमें से कितने लोग हिंदी समझते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि हिंदी का एक मुहावरा है, आपके मुंह में घी-शक्कर (आप जो कह रहे हैं, आशा है कि यह सच हो)। उनके इस उत्तर से वहां बैठे सभी लोगों ने तालियां बजाई और ठहाके लगाकर हंसने लगे।
भारतीय संस्कृति का हो रहा वैश्वीकरण
जयशंकर ने कहा कि मैं वास्तव में भारतीय संस्कृति का वैश्वीकरण होते देख सकता हूं। हालांकि यह कई कारकों पर हो रहा है। पहला- यह भारतीय समुदाय के प्रसार की वजह है। दूसरी वजह हम खुद हैं। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि हमें भारतीय संस्कृति के वैश्वीकरण को और अधिक सार्वभौमिक बनाने के तरीकों को खोजने का प्रयास करना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाया गया योग
जयशंकर यूरोपीय संघ हिंद-प्रशांत मंत्रिस्तरीय मंच (ईआईपीएमएफ) में शामिल होने के लिए स्वीडन के तीन दिवसीय दौरे पर आए हैं। भारतीय संस्कृति के प्रसार पर उन्होंने योग दिवस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस वास्तव में वह पहल है, जिसे दुनिया ने भी अपनाया है। साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग दिवस मनाने की शुरुआत की।