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जयशंकर ने की चीन के विदेश मंत्री से बात, पूर्वी लद्दाख में सैन्य वापसी पर हुई चर्चा
Thu, 25 Feb 2021 08:29 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 25 Feb 2021 08:29 PM IST
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विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को अपने चीनी समकक्ष वांग यी से वार्ता की। जानकारी के अनुसार दोनों के बीच पूर्वी लद्दाख में सैन्य वापसी और मॉस्को समझौते को लेकर चर्चा हुई। बता दें कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच वार्ताओं के कई दौर के बाद हाल ही में पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दोनों किनारों से दोनों देशों ने अपने सैनिक हटा लिए हैं।
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जयशंकर ने एक ट्वीट में कहा, ''आज दोपहर विदेश मंत्री (चीन के) वांग यी से बात की। हमारे मॉस्को समझौते और सैन्य वापसी की स्थिति पर हमने चर्चा की।' इस सैन्य वापसी के तहत भारत की सेना फिंगर 3 तक वापस आई है। वहीं, चीन की सेना फिंगर 8 इलाके तक वापस हुई है। हालांकि, भारत ने पीछे हटने के साथ किसी भी क्षेत्र पर दावा नहीं छोड़ा है।
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Spoke to State Councilor & Foreign Minister Wang Yi this afternoon. Discussed the implementation of our Moscow Agreement and reviewed the status of disengagement.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 25, 2021
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उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध को नौ महीने हो गए हैं। दोनों पक्षों के बीच अभी तक 10 दौर की कॉर्प्स कमांडर स्तरीय वार्ताओं हुई हैं। समझौते के बाद दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर क्षेत्रों से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है और अस्त्र-शस्त्रों, अन्य सैन्य उपकरणों, बंकरों तथा अन्य निर्माण को भी हटा लिया है।
सैनिकों की वापसी दोनों पक्षों के हित में: थल सेना प्रमुख
इससे पहले बुधवार को थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा था कि पैगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से भारत और चीन की सेनाओं के पीछे हटने से अंतिम परिणाम बहुत अच्छा रहा। उन्होंने कहा था कि दोनों पक्षों के लिए यह लाभकारी स्थिति है। उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में अन्य लंबित मुद्दों के समाधान के लिए भी रणनीति बनाई गई है।
थल सेना प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की सलाह भी बहुत महत्वपूर्ण रही और रणनीतिक स्तर पर उनके दृष्टिकोण से हमें अपने कदम उठाने में निश्चित तौर पर मदद मिली। मुझे लगता है कि 10 दौर की वार्ता के अच्छे परिणाम मिले हैं। नरवणे ने कहा कि पूर्वी लद्दाख के देपसांग इलाके में और उत्तरी सीमा से लगे अन्य क्षेत्रों में कुछ मुद्दे बाकी हैं।