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S Jaishankar: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर जयशंकर ने जताई चिंता, बोले- जोखिम को कम करने की सख्त जरूरत

Fri, 06 Sep 2024 10:02 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Fri, 06 Sep 2024 10:02 PM IST
सार

भारत-भूमध्यसागरीय व्यापार सम्मेलन में विदेश मंत्री ने प्रस्तावित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) का जिक्र करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य वैश्विक कनेक्टिविटी की आधारशिला बनना है।
 

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Jaishankar says Conflict in West Asia resulting in disruptions in trade flow; need de-risking
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : एएनआई

विस्तार

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के चलते जहाज मार्ग और व्यापार प्रवाह बाधित हुआ। इस जोखिम को कम करने की जरूरत है। भारत-भूमध्यसागरीय व्यापार सम्मेलन में उन्होंने प्रस्तावित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) का जिक्र करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य वैश्विक कनेक्टिविटी की आधारशिला बनना है।

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एस जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने कुछ चिंता पैदा की है। इसके चलते महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में व्यवधान पैदा हुआ और शिपिंग लागत में वृद्धि हुई। इसके चलते व्यापार प्रवाह के लिए नए मार्ग की जरूरत है। जैसे-जैसे भारत, यूरोप और मध्य पूर्व के तीन केंद्र अपनी बातचीत बढ़ाएंगे तो कनेक्टिविटी की अधिक आवश्यकता होगी।
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जी 20 शिखर सम्मेलन में घोषित की गई आईएमईसी परियोजना पर विदेश मंत्री ने कहा कि इससे नए दृष्टिकोण पैदा हुए हैं। यह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापार और अन्य प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है।  जयशंकर ने सुरक्षा और स्थिरता के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अस्थिर और अनिश्चित दुनिया में सुरक्षा और स्थिरता गणना का एक अभिन्न अंग होना चाहिए। इसलिए भूमध्यसागरीय देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना वास्तव में गहरे आर्थिक संबंधों के समान होना चाहिए। 
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चीन के बेल्ट एंड रोड की स्पर्धा में आई थी परियोजना
भारत, अमेरिका, सऊदी अरब और भारत यूरोपीय संघ चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का मुकाबला करने के उद्देश्य से जी 20 शिखर सम्मेलन में एक बहुराष्ट्रीय रेल और बंदरगाह सौदे की घोषणा की थी। इस सौदे की घोषणा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूरोपीय संघ के नेताओं के साथ मिलकर की थी। 


यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत, मध्य पूर्व के साथ-साथ यूरोप के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और उन क्षेत्रों को बांधने के लिए एक आधुनिक स्पाइस रूट की स्थापना करना है। इससे लाभान्वित होने वालों में वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग एक तिहाई हिस्सा होगा। अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि योजना में डेटा, रेल, बिजली और हाइड्रोजन पाइपलाइन परियोजनाएं शामिल होंगी। एक प्रस्तावित परियोजना संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन और इस्राइल सहित मध्य पूर्व में रेलवे और बंदरगाह सुविधाओं को जोड़ेगी। यह भारत और यूरोप के बीच व्यापार को 40 प्रतिशत तक बढ़ाएगी।

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