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Lok Sabha: 'हम पड़ोसी के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं, मगर सब उन पर ही निर्भर', जयशंकर की पाकिस्तान को दो टूक
Fri, 13 Dec 2024 02:18 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 13 Dec 2024 02:18 PM IST
सार
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि 2019 में पाकिस्तान द्वारा लिए गए कुछ फैसलों के कारण व्यापार के संबंधों में रुकावट आई है। किसी भी अन्य पड़ोसी की तरह हम पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहते हैं।
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विदेश मंत्री जयशंकर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को लोकसभा में एक बार फिर पाकिस्तान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ अच्छे और आतंक मुक्त संबंध चाहता है। हालांकि, अगर वह अपने पिछले व्यवहार को नहीं बदलता है, तो द्विपक्षीय संबंधों पर इसका असर पड़ेगा।
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आतंकवादियों से मुक्त संबंध रखना चाहेंगे हम: विदेश मंत्री
उन्होंने यह भी कहा कि 2019 में पाकिस्तान द्वारा लिए गए कुछ फैसलों के कारण व्यापार के संबंधों में रुकावट आई है। उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान कहा, 'मैं माननीय सदस्य को सूचित करना चाहूंगा कि पाकिस्तान के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के मामले में, किसी भी अन्य पड़ोसी की तरह, हम पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहते हैं। मगर किसी भी अन्य पड़ोसी की तरह, हम आतंकवादियों से मुक्त संबंध भी रखना चाहेंगे।'
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'पाकिस्तान के पाले में गेंद'
जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार का यही रुख रहा है। उन्होंने कहा, 'हम यह साफ कर चुके हैं कि पाकिस्तान पर अब निर्भर है। वह यह दिखाए कि अपना पिछला व्यवहार बदल रहा है। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो निश्चित रूप से संबंधों पर इसका असर पड़ेगा। इसलिए इस मामले में गेंद पूरी तरह से पाकिस्तान के पाले में है।'
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बता दें, केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध समाप्त हो गए थे।
भारत-चीन के बीच सेनाओं के पीछे हटने पर जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच सैनिकों के पीछे हटने का अंतिम समझौता देपसांग और डेमचोक से संबंधित था और उन्होंने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में हाल के घटनाक्रमों पर अपने विस्तृत बयान में इसका जिक्र किया था।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के एक सवाल का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि समझौते के अनुसार भारतीय सुरक्षा बल देपसांग में सभी गश्ती बिंदुओं पर जाएंगे और पूर्व की ओर की सीमा तक जाएंगे, जहां भारत की गश्त की सीमा है।
यह पूछा गया सवाल
मनीष तिवारी ने 2023 में पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों के सम्मेलन में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी द्वारा पेश किए गए एक पेपर पर एक प्रश्न पूछा था। तिवारी के अनुसार उस पेपर में बताया गया था कि कोराकोरम पास से चुमार तक 65 गश्ती बिंदुओं में से 26 चीनी कब्जे के परिणामस्वरूप भारतीय सुरक्षा बलों के लिए दुर्गम थे। तिवारी ने पूछा कि क्या वे सभी 26 गश्त बिंदु जो जाहिर तौर पर दुर्गम थे, वे सुगम हो गए हैं या नहीं।
उनके सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, 'किसी ने जो लिखा है, उसका जवाब उसे देना चाहिए। मैं सरकार की ओर से जवाब दे सकता हूं। अब मैं, महोदय, आपके माध्यम से माननीय सदस्य को याद दिलाना चाहता हूं कि मैंने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी और हाल के घटनाक्रमों पर बहुत विस्तृत बयान दिया था। उस बयान में, मैंने इस बात पर प्रकाश डाला था कि अंतिम वापसी समझौते हुए थे जो देपसांग और डेमचोक से संबंधित थे।'
'कुछ वापसी समझौते हुए हैं'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं माननीय सदस्य को यह भी बताना चाहूंगा कि बयान में यही था कि यह समझौता है कि भारतीय सुरक्षा बल देपसांग में सभी गश्त बिंदुओं पर जाएंगे और सीमा पूर्व की ओर जाएंगे जो ऐतिहासिक रूप से उस हिस्से में हमारी गश्त की सीमा रही है। उस बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हमारे पास पहले भी कुछ वापसी समझौते हुए हैं। उन विघटन समझौतों में कुछ ऐसे प्रावधान भी थे, जहां दोनों पक्षों ने अस्थायी आधार पर खुद पर कुछ प्रतिबंध लगाने पर सहमति जताई थी। इसलिए मुझे लगता है कि उस बयान में स्थिति बहुत स्पष्ट है और मैं माननीय सदस्य से उस बयान को फिर से पढ़ने का आग्रह करूंगा।'
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले पर जयशंकर ने जताई चिंता
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को बांग्लादेश में जारी संकट के बीच वहां हिंदुओं के साथ हो रहे व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को चिंता का विषय बताया।
'हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं'
जयशंकर ने लोकसभा में एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी के एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है वो चिंता का विषय है। उन पर हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं। हमने अपनी चिंता से उन्हें अवगत कराया है। हाल ही में विदेश सचिव ने ढाका का दौरा किया था। उस दौरान इस विषय पर बात हुई थी। हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश अपने स्वयं के हित में उपाय करेगा ताकि उसके अल्पसंख्यक सुरक्षित रहें।'
सरकार क्या कदम उठा रही?
ओवैसी ने संसद में पूछा था, 'बांग्लादेश के विकास के लिए हमने 10 अरब डॉलर देने का वादा किया है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही है कि बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा हो और मंदिरों की रक्षा हो?'
क्या बोले थे विदेश सचिव?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बांग्लादेश की अपनी यात्रा के दौरान कहा था, 'हमने हालिया घटनाक्रमों पर भी चर्चा की और मैंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण से संबंधित चिंताओं सहित अपनी चिंताओं से अवगत कराया। हमने सांस्कृतिक और धार्मिक संपत्तियों पर हमलों की खेदजनक घटनाओं पर भी चर्चा की। मैंने जोर देकर कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और परस्पर लाभकारी संबंध चाहता है। मैंने आज बांग्लादेश प्राधिकरण की अंतरिम सरकार के साथ मिलकर काम करने की भारत की इच्छा को रेखांकित किया है।'
सूत्रों ने बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बुधवार को विदेश मामलों पर संसद की स्थायी समिति के सदस्यों को 'भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य' के बारे में जानकारी दी और बताया कि पड़ोसी देश ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।