S Jaishankar: जयशंकर ने किया भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का जिक्र, कहा- यह एक ऐसा इंडिया है जो भारत अधिक है
S Jaishankar: विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की गहराई ने प्रामाणिक और जमीनी राजनीति को भी पोषित किया है। उन्होंने कहा कि संस्कृति और विरासत को महत्व देते हुए प्रौद्योगिकी और आधुनिकता पिछले एक दशक की प्रगति में समान रूप से दिखाई देता है।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को देश में नकदी रहित भुगतान, चंद्रमा पर उतरने और महिला सशक्तिकरण समेत प्रमुख घटनाक्रमों का जिक्र किया और इस बात पर जोर दिया कि 'यह ऐसा इंडिया है जो अधिक भारत है।' उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत ने अपने लोकतंत्र को गहरा करके प्रामाणिक और जमीनी राजनीति को बढ़ावा दिया है।
जयशंकर ने 'द इकोनॉमिस्ट' में अपने एक लेख में ये टिप्पणियां कीं और कहा, 'भारतीय लोकतंत्र की गहराई ने प्रामाणिक और जमीनी राजनीति को भी पोषित किया है।' उन्होंने कहा कि संस्कृति और विरासत को महत्व देते हुए प्रौद्योगिकी और आधुनिकता पिछले एक दशक की प्रगति में समान रूप से दिखाई देता है। आज का भारत नकदी रहित भुगतान, 5जी नेटवर्क, लूनर लैंडिंग और डिजिटल डिलीवरी में पहले नंबर पर है।
उन्होंने आगे कहा, यह (भारत) समान रूप से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मौका दे रहा है और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ रहा है। यह एक ऐसा समाज है जो अब अधिक आत्मविश्वासी, सक्षम और उत्तरदायी है। यह एक ऐसा इंडिया है जो अधिक भारत है। विदेश मंत्री जयशंकर ने इस साल भारत की जी-20 अध्यक्षता और चंद्रयान-3 मिशन की सफलता का भी जिक्र किया और उन्हें कोविड-19 के बाद तेजी से उबरने और मजबूत विकास के संकेत के रूप में चिह्नित किया।
उन्होंने कहा, भारत की अध्यक्षता में जी-20 सम्मेलन तरक्की और विकास की चुनौतियों पर फोकस था। इसे सतत विकास लक्ष्यों, हरित विकास समझौते, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एक कार्ययोजना के रूप में पेश किया गया था। एक वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) सभा का आयोजन अफ्रीकी संघ (एयू) की स्थायी जी-20 सदस्यता सुनिश्चित करने के लिए एक प्रस्तावना थी।
संकट के कठिन समय में पड़ोसी देशों के प्रति भारत के दृष्टिकोण को दोहराते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि विस्तारित पड़ोस की भारत की अवधारणा ने आसियान, खाड़ी, मध्य एशिया और हिंद महासागर में जड़ें गहरी कर दी हैं। पिछले एक दशक में भारत के 'पड़ोसी पहले' दृष्टिकोण ने नई कनेक्टिविटी और गहरे संपर्क बनाए हैं। श्रीलंका के आर्थिक संकट के लिए तेजी से प्रतिक्रिया ने महामारी-युग के समर्थन से बड़ी सद्भावना की पुष्टि की। विस्तारित पड़ोस की अवधारणा ने आसियान, खाड़ी, मध्य एशिया और हिंद महासागर में गहरी जड़ें जमा लीं।