फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Jail reforms: Supreme Court seeks report from committee in six months, will open the way for change in prison system

जेल सुधार : सुप्रीम कोर्ट ने समिति से छह माह में मांगी रिपोर्ट, खुलेगा कारागार व्यवस्था में बदलाव का रास्ता

Fri, 11 Mar 2022 01:53 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 11 Mar 2022 01:53 PM IST
सार

जस्टिस एल. नागेश्वर राव व जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने समिति को शुक्रवार को यह आदेश दिया। पीठ ने रिपोर्ट आने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने को कहा। 
 

विज्ञापन
Jail reforms: Supreme Court seeks report from committee in six months, will open the way for change in prison system
Tihar Jail - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने जेल सुधारों की सिफारिश करने के लिए गठित समिति से आज से छह माह में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट आगे सुनवाई करेगी। 
विज्ञापन


जस्टिस एल. नागेश्वर राव व जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने समिति को शुक्रवार को यह आदेश दिया। पीठ ने रिपोर्ट आने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश उस याचिका की सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें समिति को एक महीने में अंतिम रिपोर्ट देने का निर्देश देने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में उक्त समिति के सामने आने वाली कठिनाइयों का जिक्र किया। 

जेलों में अमानवीय स्थिति पर विचार
शीर्ष अदालत देश भर की 1,382 जेलों में अमानवीय स्थिति से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जेल सुधारों की सिफारिश करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अमिताभ रॉय की अध्यक्षता वाली समिति देश भर की जेलों की समस्याओं को देख रही है और उनसे निपटने के उपाय सुझा रही है।

विज्ञापन


सरकारी अधिकारी भी समिति की सहायता कर रहे हैं और एक निर्धारित समय अवधि में शीर्ष अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं। समिति जेलों में भीड़ के मुद्दे की भी जांच कर रही है। वह कैदियों को सुधार का वातावरण और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के उपाय भी सुझाएगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2021 में जेल सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे। शीर्ष कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से कहा था कि वह 2012 के बाद जेल में जिन भी कैदियों की अस्वभाविक मौत हुई हो, उनके परिजनों की पहचान के लिए संज्ञान लें और इस मामले में परिजनों को उचित मुआवजा दिलाया जाए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी. लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने जेल सुधारों के बारे में विस्तार से दिशा निर्देश जारी किए थे। इसके तहत राज्य सरकार से कहा गया है कि पहली बार अपराध करने वाले कैदियों के लिए काउंसलर नियुक्त किया जाए ताकि उनकी काउंसलिंग हो सके। साथ ही कैदियों के मेडिकल सुविधा को लेकर सर्वे करने के लिए कहा गया है। इसके लिए तमाम सुधार वाले कदम उठाने को कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में जारी दिशा निर्देश
1.सभी राज्य ओपन जेल सिस्टम के बारे में अध्ययन करें। अदालत ने कहा है कि एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया है कि ओपन जेल सिस्टम पर विचार किया जाए। शिमला में ऐसा किया गया है और साथ ही दिल्ली में सेमी-ओपन जेल बेहद कारगर रहा है। 

2.बंदियों से परिजनों की मुलाकात को बढ़ावा दिया जाए।
3.कैदियों के साथ उनके परिजनों की फोन पर बातचीत और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की संभावना को देखना चाहिए।
4.कैदियों से वकील की बातचीत के बारे में भी विचार करना चाहिए।
5.जेल में बंद कैदियों की आत्महत्या से संबंधित मामले को रोकने के लिए योजना तैयार की जाए। आत्महत्या का विचार करने वाले कैदियों और हिंसक प्रवृत्ति के कैदियों की काउंसलिंग की जाए।



 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed