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संसद: धनखड़ ने प्राण प्रतिष्ठा के लिए PM मोदी को सराहा, कहा- राम मंदिर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का उत्तम प्रतीक

Sun, 11 Feb 2024 02:31 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 11 Feb 2024 02:31 AM IST
सार

उच्च सदन में प्रस्ताव पढ़ते धनखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी को पूरे देश को एकजुट करने में अनुकरणीय भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए अनुष्ठान के कड़े नियमों का पूरी निष्ठा से पालन किया। राम मंदिर का उद्घाटन एक भारत श्रेष्ठ भारत का उत्तम प्रतीक है।

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Jagdeep Dhankhar said Ram Mandir is the best symbol of Ek Bharat Shreshtha Bharat
राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ - फोटो : संसद टीवी स्क्रीन ग्रैब

विस्तार

संसद के बजट सत्र के आखिरी दिन राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा। इस दौरान शनिवार को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में जगदीप धनखड़ ने राम मंदिर पर एक प्रस्ताव पढ़ा और कहा कि 22 जनवरी को प्राचीन और पवित्र शहर अयोध्या में राम मंदिर का उद्धाटन पूरे देश में उत्सव का दिन बन गया था। नागरिकों ने 22 जनवरी को राष्ट्रीय त्योहार के रूप में मनाया। गौरतलब है कि राम मंदिर पर राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी शनिवार को चर्चा की गई। 

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प्रधानमंत्री ने अनुष्ठान के कड़े नियमों का पालन किया
उच्च सदन में प्रस्ताव पढ़ते धनखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी को पूरे देश को एकजुट करने में अनुकरणीय भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए अनुष्ठान के कड़े नियमों का पूरी निष्ठा से पालन किया। राम मंदिर का उद्घाटन एक भारत श्रेष्ठ भारत का उत्तम प्रतीक है। ऐतिहासिक क्षण को साकार करने में सरकार ने बड़ी भूमिका निभाई। भगवान राम का मंदिर भारत के लिए एक एतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि है। राम मंदिर सांस्कृतिक और एतिहासिक दृष्टि के साथ-साथ देश की प्रगति का हिस्सा भी है।  

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देश का कोना-कोना उत्साह से लबरेज 
धनखड़ ने सदन में आगे कहा कि भगवान राम और माता सीता भारतीय समाज, संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न अंग हैं। मंदिर लोगों की आस्था और भक्ति का प्रतीक है। 22 जनवरी भारत के इतिहास का वह दिन है, जिसने देश के कोने-कोने में अपार हर्ष और उत्साह से भर दिया है। दुनिया भर की अलग-अलग संस्कृतियों में भगवान राम मौजूद हैं। भारत के साथ-साथ पूरे विश्व में आस्था का समंदर दिखाई दिया। 

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अमित शाह ने बताई संघर्ष की पूरी कहानी
लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने राम मंदिर के संघर्ष की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि 2014 से 2019 तक लंबी कानूनी लड़ाई चली। निहंगों ने लड़ाई शुरू की थी। आडवाणी जी ने सोमनाथ से अयोध्या के लिए यात्रा निकाली, जनजागृति फैलाई। अशोक सिंघल जी इसे चरम सीमा पर ले गए और आखिर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी जी ने जनआकांक्षा की पूर्ति की। कोई एक देश अपने बहुसंख्यक समाज की धार्मिक विश्वास की पूर्ति के लिए धैर्य रखकर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाता रहे, यह बात देश के लोकतांत्रिक इतिहास में लिखी जाएगी।

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