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Jagannath Temple: 'दीघा जगन्नाथ धाम' विवाद बढ़ा, बंगाल में लकड़ी के इस्तेमाल की जांच करेगा पुरी मंदिर प्रशासन
Sat, 03 May 2025 11:13 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 03 May 2025 11:13 PM IST
सार
पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दीघा मंदिर को 'धाम' कहे जाने के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे। प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने भी गजपति महाराज से अपील की है कि वे जगन्नाथ धाम की गरिमा की रक्षा के लिए सामने आएं।
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दीघा में जगन्नाथ मंदिर
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के दीघा में नए बने जगन्नाथ मंदिर को 'जगन्नाथ धाम' कहे जाने पर विवाद और गहरा गया है। इस बीच, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने जांच शुरू कर दी है कि क्या वाकई पुरी मंदिर की पवित्र लकड़ी का इस्तेमाल दीघा मंदिर की मूर्तियां बनाने में किया गया।
सीएम ममता से बात करेंगे सीएम माझी
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, जो अभी मुंबई दौरे पर हैं, रविवार को लौटकर इस मुद्दे को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा, 'पुरी के लोग 'जगन्नाथ धाम' नाम के गलत इस्तेमाल को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। 'धाम' शब्द का गहरा आध्यात्मिक मतलब है, इसे ऐसे ही कोई भी इस्तेमाल नहीं कर सकता।'
यह भी पढ़ें - PM Modi Abdullah Meet: पहलगाम पर तनाव के बीच दिल्ली आए जम्मू-कश्मीर के CM; आतंकी हमले के बाद के हालात पर चर्चा
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'दीघा को जगन्नाथ धाम कहना भक्तों को मंजूर नहीं'
हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा कि ओडिशा सरकार को देशभर में जगन्नाथ मंदिर बनाए जाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन दीघा को 'जगन्नाथ धाम' कहना भक्तों को मंजूर नहीं है। उधर, ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवाती परिडा ने भी तीखा बयान दिया। उन्होंने ममता बनर्जी का नाम लिए बिना कहा, 'जिन्होंने भगवान जगन्नाथ के नाम का गलत इस्तेमाल किया है, उन्होंने हमेशा भारी नुकसान उठाया है। अब फिर कोई नुकसान झेलेगा।' पुरी से सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी दीघा मंदिर के लिए 'जगन्नाथ धाम' नाम के इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा, 'दुनिया में सिर्फ एक ही जगन्नाथ धाम है और वो पुरी में है। चार धामों में पुरी का खास स्थान है, और इसे कोई और जगह नहीं कहला सकती।'
क्या दीघा मंदिर में पवित्र लकड़ी का इस्तेमाल हुआ?
इधर, एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पड्ही ने जांच शुरू कर दी है कि क्या दीघा मंदिर में पुरी की पवित्र लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है। यह विवाद तब बढ़ा जब पुरी के सेवक रामकृष्ण दासमहापात्रा ने एक बंगाली चैनल में कथित तौर पर कहा कि उन्होंने पुरी से लकड़ी लाकर दीघा में मूर्तियां बनाईं। लेकिन बाद में उन्होंने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि मूर्तियां नीम की लकड़ी से पुरी में ही बनाई गई थीं और फिर दीघा ले जाई गईं।
एसजेटीए ने अब पुरी मंदिर के कई सेवक संगठनों से भी राय मांगी है। शनिवार को पड्ही ने मंदिर के मुख्य सेवकों से चर्चा की और सभी सेवक संगठनों को रविवार शाम 5 बजे तक अपनी राय देने का निर्देश दिया है। इसी बीच, दैतापति निजोग के सचिव रामकृष्ण दासमहापात्रा, जो दीघा मंदिर के उद्घाटन में शामिल हुए थे, उन्हें भी नोटिस भेजकर रविवार सुबह हाजिर होने को कहा गया है।
यह भी पढ़ें - Khabaron Ke Khiladi: पहलगाम हमले के बाद कब होगा पाकिस्तान का हिसाब, विश्लेषकों ने बताया भारत कैसे सिखाएगा सबक
जगन्नाथ धाम केवल पुरी में है- गजपति महाराज
गजपति महाराज ने कहा, 'हमारे शास्त्रों के अनुसार, जगन्नाथ धाम केवल पुरी में है। इस पवित्र नाम का किसी और जगह के लिए इस्तेमाल करना धार्मिक भ्रम फैलाएगा और हमारी परंपरा के खिलाफ है।' बता दें कि, रामकृष्ण दासमहापात्रा के साथ करीब 56 और पुरी के सेवक दीघा मंदिर के कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
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सीएम ममता से बात करेंगे सीएम माझी
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, जो अभी मुंबई दौरे पर हैं, रविवार को लौटकर इस मुद्दे को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा, 'पुरी के लोग 'जगन्नाथ धाम' नाम के गलत इस्तेमाल को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। 'धाम' शब्द का गहरा आध्यात्मिक मतलब है, इसे ऐसे ही कोई भी इस्तेमाल नहीं कर सकता।'
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'दीघा को जगन्नाथ धाम कहना भक्तों को मंजूर नहीं'
हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा कि ओडिशा सरकार को देशभर में जगन्नाथ मंदिर बनाए जाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन दीघा को 'जगन्नाथ धाम' कहना भक्तों को मंजूर नहीं है। उधर, ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवाती परिडा ने भी तीखा बयान दिया। उन्होंने ममता बनर्जी का नाम लिए बिना कहा, 'जिन्होंने भगवान जगन्नाथ के नाम का गलत इस्तेमाल किया है, उन्होंने हमेशा भारी नुकसान उठाया है। अब फिर कोई नुकसान झेलेगा।' पुरी से सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी दीघा मंदिर के लिए 'जगन्नाथ धाम' नाम के इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा, 'दुनिया में सिर्फ एक ही जगन्नाथ धाम है और वो पुरी में है। चार धामों में पुरी का खास स्थान है, और इसे कोई और जगह नहीं कहला सकती।'
क्या दीघा मंदिर में पवित्र लकड़ी का इस्तेमाल हुआ?
इधर, एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पड्ही ने जांच शुरू कर दी है कि क्या दीघा मंदिर में पुरी की पवित्र लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है। यह विवाद तब बढ़ा जब पुरी के सेवक रामकृष्ण दासमहापात्रा ने एक बंगाली चैनल में कथित तौर पर कहा कि उन्होंने पुरी से लकड़ी लाकर दीघा में मूर्तियां बनाईं। लेकिन बाद में उन्होंने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि मूर्तियां नीम की लकड़ी से पुरी में ही बनाई गई थीं और फिर दीघा ले जाई गईं।
एसजेटीए ने अब पुरी मंदिर के कई सेवक संगठनों से भी राय मांगी है। शनिवार को पड्ही ने मंदिर के मुख्य सेवकों से चर्चा की और सभी सेवक संगठनों को रविवार शाम 5 बजे तक अपनी राय देने का निर्देश दिया है। इसी बीच, दैतापति निजोग के सचिव रामकृष्ण दासमहापात्रा, जो दीघा मंदिर के उद्घाटन में शामिल हुए थे, उन्हें भी नोटिस भेजकर रविवार सुबह हाजिर होने को कहा गया है।
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जगन्नाथ धाम केवल पुरी में है- गजपति महाराज
गजपति महाराज ने कहा, 'हमारे शास्त्रों के अनुसार, जगन्नाथ धाम केवल पुरी में है। इस पवित्र नाम का किसी और जगह के लिए इस्तेमाल करना धार्मिक भ्रम फैलाएगा और हमारी परंपरा के खिलाफ है।' बता दें कि, रामकृष्ण दासमहापात्रा के साथ करीब 56 और पुरी के सेवक दीघा मंदिर के कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
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