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परीक्षाओं का विरोध किया तो जादवपुर विवि की प्रोफेसर को कहे गए जातिसूचक अपशब्द

Sun, 06 Sep 2020 09:11 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 06 Sep 2020 09:11 PM IST
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Jadavpur University professor faces casteist abuse on social media on a post
जादवपुर विश्वविद्यालय की असोसिएट प्रोफेसर मरूना मुर्मू - फोटो : facebook.com/maroona.murmu

कोविड-19 महामारी के दौरान अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं कराने के बारे में एक पोस्ट करने के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर को सोशल मीडिया पर जातिवादी हमलों का शिकार होना पड़ा। जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेयूटीए) और अखिल बंगाल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (एबीयूटीए) ने जादवपुर विश्वविद्यालय में इतिहास की असोसिएट प्रोफेसर मरूना मुर्मू की फेसबुक पर एक सामान्य पोस्ट के लिए 'दुर्भावनापूर्ण जातिसूचक ट्रोलिंग' की रविवार को निंदा की।

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मुर्मू ने फेसबुक पर की गई एक पोस्ट में अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाओं को टाले जाने की जरूरत का जिक्र करते हुए लिखा था कि 'एक वर्ष किसी की पूरी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं हो सकता।' इस पोस्ट के बाद दो सितंबर को सोशल मीडिया पर वह जातिवादी अपशब्दों के साथ ही दुर्भावनापूर्ण ट्रोलिंग का शिकार बनाई गईं।
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सोशल मीडिया पर यह तब शुरू हुआ जब बेथ्यून कॉलेज की एक छात्रा ने उनकी फेसबुक वॉल पर एक टिप्पणी की। इसमें छात्रा ने कहा था कि ऐसी सोच आरक्षण केंद्रित मानसिकता से आती है। छात्रा ने अपनी टिप्पणी में यह संकेत देने की कोशिश की कि आदिवासी होने की वजह से मुर्मू को शैक्षणिक रूप से फायदा मिला।
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प्रतिष्ठित प्रेसीडेंसी कॉलेज से स्नातक और उसके बाद जेएनयू से शोध करने वाली मुर्मू ने इस बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि व्यक्तिगत तौर पर दी गई उनकी राय को कैसे एक छात्रा ने अनदेखा किया। उन्होंने हैरानी जताई कि सिर्फ आदिवासी उपनाम होने के कारण कोई अक्षम और अयोग्य कैसे ठहराया जा सकता है।

इस बयान के बाद और ट्रोलिंग होने लगी। बेथ्यून कॉलेज की तीसरे वर्ष की छात्रा के समर्थन में कई और लोगों ने टिप्पणी की तो वहीं प्रोफेसर के समर्थन में भी लोगों ने टिप्पणी करनी शुरू कर दी।

बेथ्यून कॉलेज ने किया मुर्मु का समर्थन
बेथ्यून कॉलेज छात्रों की समिति ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए कहा, 'यह बेहद आहत करने वाला और निंदनीय है कि हमारे कॉलेज की एक छात्रा को अब भी भारत में जातीय समीकरण और वंचितों के लिये आरक्षण की जरूरत का भान नहीं है। यह घटना बेहद शर्मनाक है और इससे संस्थान की बदनामी हुई है।' समिति ने कहा कि वह संस्थान की छात्रा के बयान की निंदा करती है और प्रोफेसर मुर्मू के रुख का समर्थन करती है।


जेयूटीए के महासचिव पार्थ प्रतिम रे ने कहा कि प्रोफेसर मुर्मू की योग्यता और सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाने वाला ऐसा हमला, सिर्फ जाधवपुर विश्वविद्यालय में ही नहीं बल्कि देश में कहीं के भी हर शिक्षक पर हमला है। एबीयूटीए ने भी मुर्मू की ट्रोलिंग की निंदा करते हुए कहा कि वह फासीवादी ताकतों की पीड़ित हैं, जो स्वतंत्र सोच की हवा को दूषित करना चाहते हैं और उदारवादी ताकतों को कुचलना चाहते हैं।

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