ITBP के बनाए मास्क और पीपीई सूट हुए हिट, कई राज्यों और संगठनों ने दिए ऑर्डर
- हिमवीर वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (हावा) ने भी पीपीई और मास्क के निर्माण में अपना योगदान दिया
- पीपीई सूट की लागत सौ रुपये और ट्रिपल लेयर मास्क मात्र पांच रुपये में तैयार
- एनआईटीआरए और एम्स के तकनीकी विशेषज्ञों ने भी दी मंजूरी
विस्तार
आईटीबीपी का स्टाफ अब खुद के बनाए पीपीई और मास्क इस्तेमाल कर रहा है। अच्छी बात ये है कि इस बल के बनाए गए पीपीई व मास्क की सप्लाई के लिए अब दूसरे संगठनों से आपूर्ति का आग्रह मिल रहा है।
आईटीबीपी के पास कई राज्यों के सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों की मांग आई है। खासतौर पर, गुजरात, पश्चिम बंगाल और हरियाणा। ये राज्य अधिक से अधिक ऑर्डर देने के लिए तैयार हैं। पीपीई सूट की लागत सौ रुपये और ट्रिपल लेयर मास्क पांच रुपये में तैयार हो जाता है।
आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक पांडे के अनुसार, हमारे जवानों के बनाए पीपीई और मास्क गुणवत्ता की कसौटी पर खरे उतरते हैं। साथ ही, इनका मूल्य भी कम है। यही वजह है कि अब इनकी देश में मांग बढ़ रही है।
वह बताते हैं कि शुरू में इन पीपीई और मास्क का निर्माण आईटीबीपी ने स्वयं की आवश्यकताओं, अपने स्वास्थ्यकर्मियों, केंद्रों और अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया था। जब दूसरे संगठनों ने देखा कि आईटीबीपी के मास्क और पीपीई सस्ते हैं और गुणवत्ता के सारे मापदंड भी पूरे करते हैं तो देश के कई इलाकों से सप्लाई के ऑर्डर आने लगे।
आईटीबीपी ने अब ऐसी योजना बनाई है कि प्रतिदिन तैयार होने वाले मास्क और पीपीई की निर्माण क्षमता में बढ़ोतरी कर इसे दोगुना कर दिया जाए। अभी तक आईटीबीपी की सप्लाई और स्पोर्ट बटालियन, सबोली में 200 पीपीई और 500 मास्क प्रतिदिन बनाए जा रहे थे।
आईटीबीपी ने अर्बन लोकल बॉडी, हरियाणा, रोहतक स्थित पीजी डेंटल कॉलेज, कोंडली नगर निगम और सर्वोदय स्कूल, सेक्टर-3, रोहिणी को ये पीपीई व मास्क निःशुल्क प्रदान किये हैं।
बल को देश के विभिन्न राज्यों गुजरात, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और अन्य राज्यों से रोजाना आपूर्ति के निवेदन प्राप्त हो रहे हैं। सोशल मीडिया हैंडल्स से भी बल को इसके लिए मांग प्राप्त हो रही है।
बल के परिवारों के संगठन, हिमवीर वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (हावा) ने भी पीपीई और मास्क के निर्माण में अपना योगदान दिया है। बल परिवार की महिलाओं ने अपने घरों से ही रोजाना सैकड़ों मास्क बनाने का काम शुरू किया है। अभी तक ये महिलाएं एक हजार से अधिक मास्क बना चुकी हैं।