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ग्लेशियर टूटने से मची थी रोंगटे खड़े कर देने वाली तबाही, आईटीबीपी ने दिया मुश्किल 'ऑपरेशन' को अंजाम

Sun, 07 Feb 2021 07:18 PM IST
योगेश साहू जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली।
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 07 Feb 2021 07:18 PM IST
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ITBP Executes Difficult Operation In Uttarakhand Due To Destruction Of Glacier
आइटीबीपी - फोटो : ANI
उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने की सूचना रविवार सुबह साढ़े दस बजे मिली थी। जहां पर यह घटना हुई, वहां से जोशीमठ करीब 25 किलोमीटर दूर है। धौली गंगा में बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी थी। इसके किनारे पर जो निर्माणकार्य हुआ था, वह बह चुका था। गड़रियों के मकान भी बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे। आईटीबीपी के 110 जवान सबसे पहले इस इलाके में पहुंचे थे।
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उस वक्त वहां पर तबाही का जो आलम था, वह रोंगटे खड़े करने वाला था। नदी के किनारे सूने पड़े थे। आईटीबीपी जवानों ने पहाड़ी में लोहे की कीलें ठोक कर नीचे उतरना शुरू कर दिया। धौली नदी में उस वक्त पानी का बहाव बहुत तेज था। जवानों ने खुद को रस्सी से बांधकर राहत एवं बचाव ऑपरेशन शुरु किया। करीब तीन घंटे बाद डेढ़ दर्जन लोगों को सुरक्षित तरीके से सुरंग के बाहर लाया जा सका।
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आईटीबीपी के मुताबिक, जैसे ही इस हादसे की सूचना मिली, वे तुरंत घटना स्थल की तरफ रवाना हो गए थे। रेनी गांव के निकट धौली गंगा के आसपास चारों तरफ तबाही का आलम था। वहां कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था, इसलिए निकटवर्ती इलाकों में ही श्रमिकों के रहने का इंतजाम किया गया था।
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तपोवन इलाके में भी एनटीपीसी के पावर प्रोजेक्ट के दोनों तरफ श्रमिकों की बड़ी संख्या रह रही थी। जवानों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि उन्हें बहुत अधिक ऊंचाई से नीचे आना था। पहाड़ी पर रास्ता बनाकर जवानों ने नीचे उतरने का इंतजाम किया। बाढ़ग्रस्त इलाके में लोहे की कीले लगाकर जवानों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया।

इस दल में कुछ जवानों को आगे के इलाके में भेजा गया। जो लोग नदी के किनारों के आसपास फंसे हुए थे, उन्हें निकालना शुरू कर दिया। साढ़े 12 बजे, दर्जनभर जवानों को तपोवन की तरफ भेजा गया। वहां कई घंटे बाद भी श्रमिकों की सही स्थिति पता नहीं चल सकी। अंदेशा यह जताया गया कि वहां टनल में अनेक श्रमिक फंसे हुए हैं।

उन्हें निकालने के लिए एनडीआरएफ टीमों की मदद ली गई। लिहाजा, एनडीआरएफ के पास तकनीकी उपकरण होते हैं, इसलिए उन्हें टनल वाले इलाके की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आईटीबीपी के अधिकारियों ने बताया कि कुछ ही देर बाद वहां सौ से अधिक जवानों की अतिरिक्त टीम भेजी गई। उस वक्त मौके पर एसडीआरएफ की टीम भी आ चुकी थी।

हिमवीरों ने करीब दो बजे तपोवन में, जहां सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है, वहां ऑपरेशन शुरू कर दिया। सभी जवानों को माउंटेनयरिंग उपकरण मुहैया कराए गए थे। इस इलाके में जवानों को करीब पचास मीटर नीचे उतरना पड़ा। उसके बाद वे तबाही वाले स्थान पर पहुंचे।

वहां देखा तो 16 से 20 आदमी बुरी तरह फंसे हुए थे। उनके ऊपर निर्माण सामग्री गिर पड़ी थी। उनके हाथ पांव काम नहीं कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया, केवल उनकी आंखें खुली थी और सांस चल रही थी। उनके चारों तरफ नदी की रेत ही रेत थी। उन्हें स्ट्रेचर के जरिए बाहर निकाला गया। चूंकि वहां तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती थी, इसलिए कुछ लोगों को आईटीबीपी जवान अपने कंधे पर भी लाए।

तपोवन टनल के भीतर की स्थिति बहुत खराब थी।वहां काम करने वाले कई श्रमिक टनल की दीवार के साथ चिपके हुए थे।उनके शरीर का पूरा हिस्सा रेत में धंसा हुआ था। आईटीबीपी ने यहां से 17 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।हिमवीरों ने इस दौरान टनल में से तीन शवों को भी बाहर निकाला।

ऋषि गंगा में ग्लेशियर टूटने के कारण इसके किनारे पर जो भी निर्माण कार्य किया गया था, वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। रेनी गांव के निकट बना ऋषि गंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूर तरह तबाह हो चुका था। जोशीमठ और मलरिया हाईवे पर बीआरओ द्वारा बनाया गया पुल बह गया था। वहां का रास्ता अब पूरी तरह बंद हो चुका था। वहां पर छह गड़रिये जो कि अपने पशुओं के साथ रहते थे, वे भी बाढ़ की चपेट में आ गए।


रेनी के निकट जहां पर ऋषि गंगा, धौली गंगा में मिलती है, वहां कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। धौली गंगा के निकट पांच छह घर बने हुए थे जो पानी के तेज बहाव में बह गए। तपोवन के निकट एनटीपीसी प्रोजेक्ट और आसपास के गांवों को जोड़ने वाले दो झूला ब्रिज भी पूरी तरह समाप्त हो चुके थे।
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