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हाईकोर्ट में जजों के 40 फीसदी पद हुए खाली, भरने में लग सकते हैं 15 साल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 16 Sep 2018 09:47 AM IST
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उच्च न्यायालयों (हाईकोर्ट) में जजों की नियुक्ति की जो मौजूदा रफ्तार है और अगर यह मानें कि हर साल लगभग 75-85 जज सेवानिवृत होंगे, उस हिसाब से देश के सभी 24 हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की मौजूदा 427 रिक्तियों को भरने में लगभग 15 साल लग सकते हैं।
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बता दें कि देशभर के हाईकोर्ट में फिलहाल जजों की कुल संख्या 652 है, जबकि जजों की कुल स्वीकृत संख्या 1079 है। 31 अगस्त तक हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों की संख्या की तुलना में जजों की रिक्तियां 40 फीसदी तक पहुंच गई। हाईकोर्ट में अभी न्यायाधीशों के कुल 427 पद खाली हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश पर हाल के वर्षों में एनडीए सरकार द्वारा हाईकोर्ट में सर्वाधिक जजों की नियुक्ति के बावजूद उनकी सेवानिवृति दर के हिसाब से हर साल महज 29 जजों की ही नियुक्ति हो पाई है। अप्रैल 2015 से मई 2018 के बीच कानून मंत्रालय ने 313 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को अधिसूचित किया है। यह पिछले सात सालों में सर्वाधिक है।
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इन सात सालों में अगर जजों की नियुक्ति का औसत देखा जाए तो हर साल 104 जजों की नियुक्ति हुई है। वहीं, 2012 से 2014 के बीच अगर देखा जाए तो यूपीए सरकार में 250 जजों की नियुक्ति हुई थी, जिसका औसत हर साल 83 रहा।
हाईकोर्ट में जजों की रिक्तियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। साल 2017 में अक्टूबर महीने तक हाईकोर्ट में कुल 387 जजों के पद खाली थे, जो इस साल मार्च तक बढ़कर 406 हो गए। इसके बाद 31 अगस्त तक इसमें और बढ़ोतरी हुई, जिसके बाद जजों की रिक्तियां अब 427 हो गई हैं।
एक अनुमान लगाएं तो अगले तीन सालों में हाईकोर्ट के औसतन 65 जज हर साल सेवानिवृत होने वाले हैं। इससे जजों की रिक्तियों में और इजाफा हो सकता है। हाईकोर्ट में इतनी बड़ी संख्या में जजों की रिक्तियां चिंता का विषय हैं, क्योंकि सिर्फ हाईकोर्ट में इस वक्त फिलहाल 40 लाख मामले लंबित हैं। इनमें से 22 फीसदी मामले 10 साल से भी ज्यादा समय से चल रहे हैं।