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CODRR Workshop: 'ग्लेशियर झीलों के जोखिम को कम करना जरूरी', चौथे सीओडीआरआर कार्यशाला में बोले पीके मिश्रा
Wed, 13 Nov 2024 05:04 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: शुभम कुमार
Updated Wed, 13 Nov 2024 05:04 AM IST
सार
पीएम मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने मंगलवार को जोखिम न्यूनीकरण के लिए रणनीतियों पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण समिति (सीओडीआरआर) की चौथी कार्यशाला को संबोधित किया। जहां उन्होंने कहा कि समुदायों के सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए ग्लेशियल झीलों के जोखिमों को कम करना होगा।
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पीके मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने कहा कि समुदायों के सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए ग्लेशियल झीलों के जोखिमों को कम करना होगा। उन्होंने कहा कि सिक्किम ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट बाढ़ आपदा पर चर्चा ने चुनौती की विशालता की ओर ध्यान आकर्षित किया है। वास्तव में, दक्षिण ल्होनाक जीएलओएफ हम सभी के लिए एक चेतावनी थी।
बता दें कि डॉ. मिश्रा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जोखिम न्यूनीकरण के लिए रणनीतियों पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण समिति (सीओडीआरआर) की चौथी कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। जहां उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और जल संसाधन विभाग की सराहना की।
झीलों से जुड़े जोखिमों को दर्शाया
डॉ. मिश्रा ने ग्लेशियल झीलों से जुड़े जोखिमों को दूर करने के लिए प्रभावी रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने पीएम मोदी के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण का अर्थ केवल आपदाओं का जवाब देना नहीं, बल्कि लचीलापन बनाना भी है। आपदाओं से निपटने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें रोकना है। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य और अनुभवों, विशेष रूप से भारत के अनुभवों, जोखिमों और संबंधित पहलुओं को कम करने में चुनौतियों का उल्लेख किया।
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सुरक्षित भविष्य के लिए दिया संदेश
डॉ. मिश्रा ने कहा कि हमें एक सुरक्षित दुनिया बनाने के लिए सीमाओं और विषयों के पार मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने जीएलओएफ जोखिमों जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग के पक्ष में, डॉ. मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की प्रतिबद्धता राष्ट्रीय सीमाओं से परे है। इसलिए भूटान, नेपाल, पेरू, स्विट्जरलैंड और ताजिकिस्तान जैसे देशों के जीएलओएफ विशेषज्ञों के साथ जुड़ना महत्वपूर्ण पहलू है।
भारत के कोडीआरआर ने समन्वय को दिया नया रूप....
डॉ पीके आगे कहा कि भारत सरकार ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण समिति (कोडीआरआर) नामक एक समन्वय मंच शुरू किया। इस मंच ने हमें नियमित फीडबैक के बाद बैठकों की एक शृंखला आयोजित करने, इसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रीय वैज्ञानिक एजेंसियों और राज्यों के बीच नए सिरे से संवाद करने में सक्षम बनाया। साथ ही केंद्रीय एजेंसियों से पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित करते हुए राज्यों को प्राथमिक जिम्मेदारी सौंपने का रास्ता खोला।
त्रि-फोकल लेंस - आकलन, निगरानी और शमन
त्रि-फोकल लेंस के माध्यम से भारत ने पर्याप्त प्रगति की है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्यों को 2024 की गर्मियों में सभी ए-श्रेणी की झीलों का आकलन करने के लिए अभियान चलाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इससे स्थानीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण भागीदारी हुई।
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बता दें कि डॉ. मिश्रा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जोखिम न्यूनीकरण के लिए रणनीतियों पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण समिति (सीओडीआरआर) की चौथी कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। जहां उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और जल संसाधन विभाग की सराहना की।
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झीलों से जुड़े जोखिमों को दर्शाया
डॉ. मिश्रा ने ग्लेशियल झीलों से जुड़े जोखिमों को दूर करने के लिए प्रभावी रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने पीएम मोदी के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण का अर्थ केवल आपदाओं का जवाब देना नहीं, बल्कि लचीलापन बनाना भी है। आपदाओं से निपटने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें रोकना है। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य और अनुभवों, विशेष रूप से भारत के अनुभवों, जोखिमों और संबंधित पहलुओं को कम करने में चुनौतियों का उल्लेख किया।
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सुरक्षित भविष्य के लिए दिया संदेश
डॉ. मिश्रा ने कहा कि हमें एक सुरक्षित दुनिया बनाने के लिए सीमाओं और विषयों के पार मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने जीएलओएफ जोखिमों जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग के पक्ष में, डॉ. मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की प्रतिबद्धता राष्ट्रीय सीमाओं से परे है। इसलिए भूटान, नेपाल, पेरू, स्विट्जरलैंड और ताजिकिस्तान जैसे देशों के जीएलओएफ विशेषज्ञों के साथ जुड़ना महत्वपूर्ण पहलू है।
भारत के कोडीआरआर ने समन्वय को दिया नया रूप....
डॉ पीके आगे कहा कि भारत सरकार ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण समिति (कोडीआरआर) नामक एक समन्वय मंच शुरू किया। इस मंच ने हमें नियमित फीडबैक के बाद बैठकों की एक शृंखला आयोजित करने, इसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रीय वैज्ञानिक एजेंसियों और राज्यों के बीच नए सिरे से संवाद करने में सक्षम बनाया। साथ ही केंद्रीय एजेंसियों से पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित करते हुए राज्यों को प्राथमिक जिम्मेदारी सौंपने का रास्ता खोला।
त्रि-फोकल लेंस - आकलन, निगरानी और शमन
त्रि-फोकल लेंस के माध्यम से भारत ने पर्याप्त प्रगति की है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्यों को 2024 की गर्मियों में सभी ए-श्रेणी की झीलों का आकलन करने के लिए अभियान चलाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इससे स्थानीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण भागीदारी हुई।