फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   it act: why Govt has asked social media platforms to take down Manipur video

Manipur: केंद्र ने सोशल मीडिया कंपनियों से मणिपुर के वीडियो हटाने को क्यों कहा? जानें धारा 69 (A) के बारे में

Fri, 21 Jul 2023 06:35 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 21 Jul 2023 06:35 PM IST
विज्ञापन
सार
Manipur News: दो महीने से ज्यादा समय पहले हुई घटना का वीडियो बुधवार 19 जुलाई को वायरल हुआ। इस बीच केंद्र सरकार ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से वीडियो हटाने के लिए कहा। दरअसल, केंद्र के पास आईटी एक्ट की धारा 69 (ए) के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को सामग्री हटाने के आदेश जारी करने की शक्ति है।
loader
it act: why Govt has asked social media platforms to take down Manipur video
मणिपुर में हिंसा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन - फोटो : PTI

विस्तार

मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने और कथित सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो सामने आने के बाद से पूरे देश में गुस्सा और नाराजगी है। मणिपुर में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस सबके बीच केंद्र सरकार ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स से मामले से जुड़े वीडियो हटाने के लिए कहा है। केंद्र ने यह आदेश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 (ए) के तहत दिया है। 



वहीं, सरकार की मांग के जवाब में वीडियो साझा करने वाले कई यूजर्स को भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर मणिपुर में हुआ क्या है? केंद्र ने घटना से जुड़ा वीडियो हटाने के लिए क्यों कहा? आईटी एक्ट की धारा 69 (ए) क्या है? क्या इसका इस्तेमाल कभी भी किया जा सकता है? 

मणिपुर में हिंसा
मणिपुर में हिंसा - फोटो : अमर उजाला
आखिर मणिपुर में हुआ क्या है?
मणिपुर में जारी हिंसा के बीच एक वीडियो सामने आया, जिसमें महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया जा रहा है। यह घटना राज्य की राजधानी इंफाल से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगपोकपी जिले के गांव बी. फीनोम में हुई। 

ग्राम प्रधान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, चार मई को शाम लगभग तीन बजे 900-1000 की संख्या में कई संगठनों से जुड़े हथियारबंद लोग बी. फीनोम गांव में जबरदस्ती घुस आए। हिंसक भीड़ ने पहले सभी घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की। बाद में इसी भीड़ द्वारा यहां की तीन महिलाओं को उनके कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया और भीड़ के सामने ही निर्वस्त्र कर दिया गया। हैवानियत यहीं सीमित नहीं रही, एक 21 साल की लड़की का दिन दहाड़े बेरहमी से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इसी दौरान बहन को बचाने आए 19 वर्षीय छोटे भाई की मौके पर ही हत्या कर दी गई। हालांकि, पीड़िता कुछ लोगों की मदद से मौके से भागने में सफल रही। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने चार आरोपियों की गिरफ्तारी की है। 

सोशल मीडिया
सोशल मीडिया - फोटो : सोशल मीडिया
केंद्र ने घटना से जुड़ा वीडियो हटाने के लिए क्यों कहा?
दो महीने से ज्यादा समय पहले हुई घटना का वीडियो बुधवार 19 जुलाई को वायरल हुआ। इस बीच केंद्र सरकार ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से वीडियो हटाने के लिए कहा। जानकारी के मुताबिक, सरकार की मांग के जवाब में वीडियो साझा करने वाले कुछ अकाउंट के ट्वीट भारत में ब्लॉक कर दिए गए हैं। इस बारे में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, 'वीडियो को हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों के साथ कुछ लिंक साझा किए गए, क्योंकि इससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बाधित हो सकती है।'

दरअसल, केंद्र के पास सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 (ए) के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को सामग्री हटाने के आदेश जारी करने की शक्ति है।

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव - फोटो : सोशल मीडिया
आईटी अधिनियम की धारा 69 (ए) क्या है?
आईटी अधिनियम की धारा 69 सरकार को इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी), दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, वेब होस्टिंग सेवाओं, सर्च इंजन, ऑनलाइन मार्केटप्लेस इत्यादि जैसे ऑनलाइन मध्यस्थों को सामग्री हटाने का आदेश जारी करने की अनुमति देती है। धारा के अनुसार हटाने जाने वाली जानकारी या सामग्री को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या कानून व्यवस्था के लिए खतरा माना जाता है।

नियमों के अनुसार, सरकार द्वारा किया गया कोई भी अनुरोध एक समीक्षा समिति को भेजा जाता है। आगे यही समिति ये निर्देश जारी करती है। आईटी अधिनियम की धारा 69 (ए) के तहत जारी किए गए ब्लॉकिंग आदेश आमतौर पर गोपनीय प्रकृति के होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
धारा 69(ए) पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
2015 के एक ऐतिहासिक फैसले में श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66ए को रद्द कर दिया था। इसमें संचार सेवाओं आदि के माध्यम से आपत्तिजनक संदेश भेजने के लिए सजा का प्रावधान था। याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2009 की धारा 69ए को भी चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे संवैधानिक रूप से वैध माना।

कोर्ट ने कहा, 'यह देखा जाएगा कि धारा 66ए के विपरीत धारा 69ए कई सुरक्षा उपायों के साथ एक सीमित प्रावधान है। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये फैसला केवल वहीं लिया जा सकता है, जहां केंद्र सरकार संतुष्ट हो कि ऐसा करना आवश्यक है।' कोर्ट ने यह भी कहा था कि ऐसे अवरोधक आदेश में कारणों को लिखित रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। 

PM Modi
PM Modi - फोटो : ANI
इस पर केंद्र का क्या रुख है?
दिसंबर 2021 में एक याचिका के जवाब में अपने हलफनामे में केंद्र ने इस धारा पर रुख स्पष्ट किया था। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा था कि इस अधिनियम की धारा 69 ए मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित मामलों पर ही लागू होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed