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Nari Sansad: ऋषिकेश में नारी संसद के आयोजन में जुटेंगे ये प्रमुख चेहरे, महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

Sat, 01 Oct 2022 06:55 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 01 Oct 2022 06:55 PM IST
सार

Nari Sansad: नारी संसद के सहसंयोजक रवि शंकर तिवारी ने बताया कि इसके अलग-अलग सत्रों में मुख्य अतिथि के तौर पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और केंद्रीय संस्कृति मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड ऋतु खंडूरी भूषण भी शामिल होंगी...

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issues related to women will be discussed in Nari Sansad
Nari Sansad: KN Govindacharya - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

लोक संसद का अगला जुटान 8-9 अक्तूबर 2022 को परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में होने जा रहा है। माता ललिता देवी सेवाश्रम ट्रस्ट और परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन के विमर्श के केंद्र में भारतीय नारी होगी। इस दौरान नारी संसद भी लगेगी। दो दिवसीय इस संसद के चार सत्र आयोजित होंगे। संसद के पत्र में परिवार की संरचना और कार्य संचालन, दूसरे सत्र में विदुषी वक्ता खुद बताएंगी कि भारतीय नारी के लिए क्या-क्या करना ठीक रहेगा, उसके सपने क्या हैं और चुनौती कहां आ रही है। तीसरा सत्र नारी शिक्षा, स्वास्थ्य व पर्यावरण से जुड़ा है।

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नारी संसद के सहसंयोजक रवि शंकर तिवारी ने बताया कि इसके अलग-अलग सत्रों में मुख्य अतिथि के तौर पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और केंद्रीय संस्कृति मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड ऋतु खंडूरी भूषण भी शामिल होंगी। कार्यक्रम में परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, चिंतक व विचारक केएन गोविंदाचार्य और जल पुरुष राजेंद्र सिंह का भी मार्गदर्शन होगा। सांसद मनोज तिवारी, पर्यावरणविद् वंदना शिवा बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। इसके अलावा दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर समेत दूसरे विश्वविद्यालयों की प्रोफेसर, उत्तराखंड से तमिलनाडु तक की एंटरप्रेन्योर, शोधार्थी और जमीन पर काम करके समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहीं महिलाएं भी अपने अनुभवों को नारी संसद में शेयर करेंगी। भारतीय चिंतक केएन गोविंदाचार्य के संरक्षकता में आयोजित दो दिवसीय नारी संसद की अध्यक्षता परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि जी करेंगे। बतौर सह संयोजक आयोजन की पूरी कार्ययोजना तैयार करने और उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रो. प्रत्यूष वत्सला, प्रो. सीमा सिंह, प्रो. रचना बिमल और प्रो. कुमुद शर्मा उठा रही हैं।

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विचारक केएन गोविंदाचार्य ने बताया कि इस दो दिवसीय आयोजन का मकसद भारतीय नजरिए से महिलाओं के अतीत और वर्तमान पर संजीदा विमर्श को आगे बढ़ाना है। इससे व्यावहारिक ज्ञान की जो धारा निकलेगी, उससे भविष्य की कार्ययोजना के प्रस्ताव तैयार होंगे। जो काम राज्य को करना है, उससे जुड़े प्रस्ताव केंद्र व राज्य सरकारों को सौंपे जाएंगे। और जो समाज को करना है, उसे समाज को। नारी को लेकर भारत की जो समझ है, देश-समाज की चेतना है, वह यह कि परस्पर पूरकता ही समाज में संपूर्णता लाती है। लेकिन पिछले 200 साल की स्थितियों में बड़ा बदलाव आया है।

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उन्होंने आगे कहा, आज पश्चिमी सामाजिक परिस्थितियों से प्रभावित विचार हावी होने लगे हैं। इसमें नारी का वस्तुकरण होने लगा है। नारी वस्तु समझी जाने लगी है। यह बाजारवाद की अधिकता का नतीजा है। यहां सुख मतलब केवल भौतिक सुख, सुख मतलब केवल मेरा सुख रह गया है। यह वातावरण के प्रदूषण का परिणाम है। आज के दौर में इन सबकी मीमांसा की जानी चाहिए। नारी की समाज में, घर में, बाहर भूमिका क्या हो, इस पर एक बार पुनः चिंतन की जरूरत है। नारी संसद इसी की जमीन तैयार करेगी। और यही नहीं, इससे ज्यादा जरूरी भी कई दूसरी चीजें हैं। घर की सत्ता, संपत्ति और सम्मान में नारी की भागीदारी हो, गृहलक्ष्मी की भूमिका में वह घर की धुरी कैसे रहे, आज की नारी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक तीनों दायित्वों में संतुलन बिठा सके, घर में उसकी भूमिका, घर के बाहर उसकी भूमिका, काम करने वाली महिला की भूमिका, मजदूरी करने वाली महिला की भूमिका, जो समाज के अलग-अलग स्तरों पर महिला की भूमिका है, उसका भी एक बार विचार, समालोकन होने की आवश्यकता है।

उन्होंने आगे कहा, कोशिश इन सवालों के जवाब भी ढूंढने की होगी कि नारी की स्वतंत्रता और समानता की व्याख्या कौन करेगा और वह क्या होगी। नारी सशक्तिकरण की परिभाषा तय कौन करेगा। परिवार का ढांचा क्या होना चाहिए। क्या हम ऐसे समाज और परिवार की कल्पना कर सकते हैं, जिसमें मां न हो, संबंध न हों। मातृत्व जवाबदेही है या जिम्मेदारी। नारी शिक्षा, स्वास्थ्य, सतत विकास जैसे मसलों का कैसे माकूल हल निकला जाए। घर और बाहर कैसे सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। नारी संसद में इन सब बेहद जरूरी मुद्दों कई फलप्रद विचार सामने आएंगे और संतों का मार्गदर्शन भी समाज के लिए प्राप्त होगा।

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