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राज्यसभा: अंग्रेजी को पूरक भाषा के रूप में पढ़ाने का मुद्दा उठा

Sat, 07 Aug 2021 03:42 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sat, 07 Aug 2021 03:42 AM IST
सार

  • शून्यकाल के बाद विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सोमवार तक कार्यवाही स्थगित

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Issue of teaching English as supplementary language raised in Rajya Sabha
राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा - फोटो : ANI

विस्तार

राज्यसभा में शुक्रवार को शून्यकाल में अंग्रेजी को पूरक भाषा के तौर पर पढ़ाने और ओडिशा में ढांचागत विकास का मुद्दा उठा। उच्च सदन की कार्यवाही की शुरुआत से ही विपक्षी सांसद पेगासस जासूसी पर मांग को लेकर हंगामा करते रहे। कुछ सांसद वेल में पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। दो बार स्थगन के बाद अंत में दोपहर 12 बजे उपसभापति ने सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

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राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही उपसभापति हरिवंश ने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले रवि दहिया को बधाई दी। इसके बाद उन्होंने विधायी कामकाज शुरू किया। इस बीच विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी आवास और शहरी मामलों से संबंधी अपने बयान को  सदन पटल पर रखने के लिए जैसे ही खड़े हुए, विपक्षी सदस्यों ने हूटिंग शुरू कर दी।
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शून्यकाल के दौरान शून्यकाल में भाजपा सदस्य हरनाथ सिंह यादव ने अंग्रेजी विषय को पूरक विषय के रूप में पढ़ाए जाने का मसला उठाया। उन्होंने कहा, क्षेत्रीय भाषाओं को पाठ्यक्रम में प्रमुखता दी जानी चाहिए। वहीं डॉ. संबित पात्रा ने उड़ीसा में अधिक ढांचागत विकास का मुद्दा उठाते हुए कहा, राज्य प्राकृतिक आपदाओं से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
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इसके चलते राज्य की अर्थव्यवस्था भी खासी प्रभावित हो रही है, लिहाजा केंद्र सरकार को साझा पैटर्न को बदलना चाहिए और कई योजनाओं में 60 फीसदी और 40 फीसदी की केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी का जो पैटर्न है उसको बदला जाना चाहिए। उसे केंद्र द्वारा 90 फीसदी और राज्य के शेयर में 10 फीसदी के अनुपात में फंड दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, उड़ीसा को विशेष फोकस वाले राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए। इसके चलते उसे तीन साल के लिए विशेष सहायता के तौर पर केंद्र से आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।


सांसद रामनाथ ठाकुर ने अदालतों में लंबित मामलों का मुद्दा उठाते हुए कहा, इस समय देश की विभिन्न अदालतों में लगभग चार करोड़ मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट में आठ पद खाली हैं और दो और इस महीने खाली हो जाएंगे, लिहाजा और अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति की जरूरत है।

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