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Hindi News ›   India News ›   Issue of D-voters of Bengali Hindus to be resolved in 6 months after polls: Assam CM

Assam: 'चुनाव के बाद छह महीने में हल हो जाएगा डी-वोटर्स का मुद्दा', असम के मुख्यमंत्री सरमा का एलान

Sun, 07 Apr 2024 10:49 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 07 Apr 2024 10:49 PM IST
सार

Assam: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि बंगाली हिंदुओं के डी-वोटर का मुद्दा चुनाव के छह महीने बाद स्थायी रूप से हल हो जाएगा। डी-वोटर वे हैं जो अपनी भारतीय राष्ट्रीयता के पक्ष में सबूत नहीं दे सके।

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Issue of D-voters of Bengali Hindus to be resolved in 6 months after polls: Assam CM
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार को कहा कि राज्य के बंगाली-हिंदुओं के डी-वोटर्स (संदिग्ध मतदाता) का मुद्दा चुनाव के बाद छह महीने में हल हो जाएगा। उन्होंने कांग्रेस को पुराना नोट करार दिया और कहा कि उसे अब कोई स्वीकार नहीं करता है।

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सरमा काजीरंगा लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले होजाई में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाली हिंदुओं के डी-वोटर का मुद्दा चुनाव के छह महीने बाद स्थायी रूप से हल हो जाएगा। डी-वोटर वे हैं जो अपनी भारतीय राष्ट्रीयता के पक्ष में सबूत नहीं दे सके। डी-वोटर्स का मुद्दा असम के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के सबसे विवादित विषयों में से एक है। 

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राज्य में डी-वोटर्स की अवधारा 1997 में पेश की गई थी। यह भारत में किसी ओर राज्य में नहीं है। इस साल फरवरी में असम विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक राज्य में 96 हजार 987 डी-वोटर हैं। अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के इस एकमात्र मुद्दे पर कई चुनाव लड़े गए हैं, जिन्हें शुरू में डी-वोटर के रूप में चिह्नित किया जाता था, अघर उनके नाम मतदाता सूची में पाए जाते हैं। 

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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा नीत एनडीए शासन के दौरान असम शांति और विकास का गवाह बन रहा है। सरमा ने कहा कि उनकी सरकार बेरोजगारी और खराब सड़क नेटवर्क जैसी कई समस्याओं का समाधान कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में राज्य में शांति नहीं थी और विस्फोट, गोलीबारी और विभिन्न समुदायों के बीच संघर्ष आम बात थी। लेकिन अब भाषा, धर्म और जाति से परे सभी समुदाय शांति से रह रहे हैं।

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