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TV D1 Onboard Video: गगनयान के व्हीकल टेस्ट फ्लाइट टीवी डी-1 से देखें पूरी प्रक्रिया, ISRO ने जारी किया वीडियो
Sun, 22 Oct 2023 05:11 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Sun, 22 Oct 2023 05:11 PM IST
सार
इसरो ने गगनयान टीवी-डी1मिशन टेस्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किया है।
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Gaganyaan TV-D1 Mission test
- फोटो : Social Media
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विस्तार
इसरो ने गगनयान टीवी-डी1मिशन टेस्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किया है। इससे पहले शनिवार को इसरो ने गगनयान क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग के लिए टीवी डी-1 उड़ान का परीक्षण किया था, जिसमें आगरा के बने 10 पैराशूट सिस्टम से क्रू मॉड्यूल की रफ्तार थामने के साथ सटीक जगह पर लैंडिंग कराई गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि टीवी डी-1 उड़ान का उद्देश्य गगनयान मिशन का एक परीक्षण निरस्त होने पर पैराशूट सिस्टम, क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण करना था।
इसरो के गगनयान कार्यक्रम में तीन सदस्यीय दल तीन दिनों के लिए 400 किमी (250 मील) की कक्षा में रॉकेट की मदद से जाएंगे। इन अंतरिक्ष यात्रियों को पैराशूट सिस्टम के जरिए अंतरिक्ष से लौटने वाले क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग करानी होगी। गगनयान को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से पृथ्वी की सतह पर ला सके। पैराशूट अंतरिक्ष से लौटने वाले क्रू मॉड्यूल की गति को रोकने के लिए एक ब्रेकिंग सिस्टम के रूप में रहेगा।
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‘क्रू मॉ्डयूल’ की समुद्र से सुरक्षित प्राप्ति
इससे पहले भारत ने शनिवार को अपने महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान में पहली मानव रहित परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली। इससे पहले परीक्षण को कुछ खामियों की वजह से प्रक्षेपण से महज चार सेकंड पहले रोक दिया गया, लेकिन इसके दो घंटे से कम समय बाद इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों में चालक दल की सुरक्षा का परीक्षण करने के लिए मॉड्यूल योजना के अनुसार सटीकता के साथ बंगाल की खाड़ी में पैराशूट का उपयोग कर उतरा। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि ‘क्रू मॉड्यूल’ को समुद्र से बरामद कर लिया गया है और इसे चेन्नई बंदरगाह पर लाया गया है।
परीक्षण में क्या खास था?
परीक्षण में खाली क्रू मॉड्यूल को बाहरी अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करना, इसे पृथ्वी पर वापस लाना और इसके उतरने के बाद समुद्र से इसकी पुनर्प्राप्ति करना शामिल था। परीक्षण यान मिशन समग्र गगनयान कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि उड़ान परीक्षण के लिए लगभग पूरी प्रणाली को एकीकृत किया गया था।
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#WATCH | ISRO tweets Onboard video of Gaganyaan TV-D1 Mission test.
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(Video Source: ISRO) pic.twitter.com/wlQvNMVoIZ — ANI (@ANI) October 22, 2023
इसरो के गगनयान कार्यक्रम में तीन सदस्यीय दल तीन दिनों के लिए 400 किमी (250 मील) की कक्षा में रॉकेट की मदद से जाएंगे। इन अंतरिक्ष यात्रियों को पैराशूट सिस्टम के जरिए अंतरिक्ष से लौटने वाले क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग करानी होगी। गगनयान को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से पृथ्वी की सतह पर ला सके। पैराशूट अंतरिक्ष से लौटने वाले क्रू मॉड्यूल की गति को रोकने के लिए एक ब्रेकिंग सिस्टम के रूप में रहेगा।
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‘क्रू मॉ्डयूल’ की समुद्र से सुरक्षित प्राप्ति
इससे पहले भारत ने शनिवार को अपने महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान में पहली मानव रहित परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली। इससे पहले परीक्षण को कुछ खामियों की वजह से प्रक्षेपण से महज चार सेकंड पहले रोक दिया गया, लेकिन इसके दो घंटे से कम समय बाद इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों में चालक दल की सुरक्षा का परीक्षण करने के लिए मॉड्यूल योजना के अनुसार सटीकता के साथ बंगाल की खाड़ी में पैराशूट का उपयोग कर उतरा। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि ‘क्रू मॉड्यूल’ को समुद्र से बरामद कर लिया गया है और इसे चेन्नई बंदरगाह पर लाया गया है।
परीक्षण में क्या खास था?
परीक्षण में खाली क्रू मॉड्यूल को बाहरी अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करना, इसे पृथ्वी पर वापस लाना और इसके उतरने के बाद समुद्र से इसकी पुनर्प्राप्ति करना शामिल था। परीक्षण यान मिशन समग्र गगनयान कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि उड़ान परीक्षण के लिए लगभग पूरी प्रणाली को एकीकृत किया गया था।