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सफलता की ओर बढ़ते कदम: गगनयान मिशन से पहले इसरो को मिली बड़ी कामयाबी, जानें क्या है पूरा मामला
Sat, 28 Aug 2021 07:21 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 28 Aug 2021 07:21 PM IST
सार
परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरी में इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया। इसरो के मुताबिक, सिस्टम ठीक तरीके से काम कर रहे हैं। यह हमारे अनुमान के मुताबिक काम कर रहा है।
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इसरो
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को गगनयान सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम के सिस्टम डिमॉन्स्ट्रेशन मॉडल (एसडीएम) का पहला हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक किया। यह टेस्ट तमिलनाडु के महेंद्रगिरी में इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया।
इसरो के मुताबिक, सिस्टम ठीक तरीके से काम कर रहे हैं। यह हमारे अनुमान के मुताबिक काम कर रहा है। इसके अलावा अलग-अलग स्थितियों में ऐसे कई परीक्षण करने की योजना बनाई गई है। इसमें परिस्थितियां भी अलग-अलग रखी जाएंगी।
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इसरो के मुताबिक, सिस्टम ठीक तरीके से काम कर रहे हैं। यह हमारे अनुमान के मुताबिक काम कर रहा है। इसके अलावा अलग-अलग स्थितियों में ऐसे कई परीक्षण करने की योजना बनाई गई है। इसमें परिस्थितियां भी अलग-अलग रखी जाएंगी।
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ISRO successfully conducted the first hot test of System Demonstration Model of Gaganyaan Service Module Propulsion System at the test facility of ISRO Propulsion Complex, Mahendragiri in Tamil Nadu today: ISRO pic.twitter.com/2Rjp8OMXNR
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) August 28, 2021
पिछला मिशन सफल नहीं हो पाया था
इससे पहले 15 अगस्त से ठीक पहले इसरो का EOS-03 उपग्रह का प्रक्षेपण नाकाम रहा था। इससे इस मिशन को करारा झटका लगा था। इंजन में खराबी के कारण इसरो का महत्वाकांक्षी मिशन पूरा नहीं हो सका था। इसे अंतरिक्ष से धरती की निगरानी करनी थी, इसीलिए इसे भारत की सबसे तेज आंखें भी कहा जा रहा था, लेकिन मिशन अधूरा ही रहा गया।
इसरो ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 12 अगस्त की सुबह 5 बजकर 43 मिनट पर जीएसएलवी-एफ 10 के जरिए धरती पर निगरानी रखने वाले उपग्रह EOS-03 का प्रक्षेपण शुरू किया था। पहले दो चरण में ये कामयाबी के साथ आगे बढ़ा, लेकिन तीसरे चरण में इसके क्रायोजेनिक इंजन में खराबी आ गई थी।
इसरो ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 12 अगस्त की सुबह 5 बजकर 43 मिनट पर जीएसएलवी-एफ 10 के जरिए धरती पर निगरानी रखने वाले उपग्रह EOS-03 का प्रक्षेपण शुरू किया था। पहले दो चरण में ये कामयाबी के साथ आगे बढ़ा, लेकिन तीसरे चरण में इसके क्रायोजेनिक इंजन में खराबी आ गई थी।
साल का पहला मिशन फरवरी में हुआ था
इससे पहले 28 फरवरी को इसरो ने साल के पहला मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। भारत का रॉकेट 28 फरवरी को श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से पहली बार ब्राजील का उपग्रह लेकर अंतरिक्ष रवाना हो हुआ था। ब्राजील के अमेजोनिया-1 और 18 अन्य उपग्रहों को लेकर भारत के पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) सी-51 ने श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी। इस अंतरिक्ष यान के शीर्ष पैनल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर उकेरी गई थी।