ISRO: 'जीएसएलवी-एफ15 का इंटीग्रेशन पूरा', इसरो ने कहा- लॉन्च के लिए तैयार; 29 जनवरी को रॉकेट की लॉन्चिंग
ISRO: इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में बताया कि, 'जीएसएलवी-एफ15 का इंटीग्रेशन पूरा हो गया है! इस मिशन के पीछे की अद्भुत टीमवर्क की एक झलक देखें। इसरो ने बताया कि, लॉन्च के काउंटडाउन में 3 दिन से कम बचे हैं!
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📸 GSLV-F15 integration complete! Take a sneak peek at the incredible teamwork behind this mission:
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Countdown: Less than 3 days to launch! Join us as we unlock new frontiers. 🚀
More information at: https://t.co/ttZheUYypF#GSLV #NAVIC #ISRO pic.twitter.com/UNlMRvV0nG— ISRO (@isro) January 26, 2025
एक्स पर इसराे ने साझा की जानकारी
इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में बताया कि, 'जीएसएलवी-एफ15 का इंटीग्रेशन पूरा हो गया है! इस मिशन के पीछे की अद्भुत टीमवर्क की एक झलक देखें। लॉन्च के काउंटडाउन में 3 दिन से कम बचे हैं!। इसरो ने बताया कि जीएसएलवी-एफ15, एनवीएस-02 सैटेलाइट को भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा में स्थापित करेगा। इसे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाएगा।
🔍 The GSLV-F15, a powerhouse of India's launch vehicles, is ready to soar!
— ISRO (@isro) January 25, 2025
Equipped with advanced cryogenic technology, it will carry the NVS-02 satellite into orbit.
Stay with us as we prepare for this monumental launch! 🌠
More information at: https://t.co/ttZheUYypF… pic.twitter.com/l9aKTi2XyQ
एनवीएस सीरीज का दूसरा सैटेलाइट है एनवीएस-02
बता दें कि, एनवीएस-01, जो दूसरी पीढ़ी का पहला सैटेलाइट था, 29 मई 2023 को जीएसएलवी-एफ12 के जरिए लॉन्च किया गया था। जबकि, एनवीएस-02, एनवीएस सीरीज का दूसरा सैटेलाइट है। इसमें एल1, एल5 और एस बैंड में नेविगेशन पेलोड के साथ-साथ सी-बैंड में रेंजिंग पेलोड भी लगाया गया है, जैसा कि इसकी पहली पीढ़ी की सैटेलाइट एनवीएस-01 में था।
🌍 Meet NVS-02, the next-gen satellite in the Navigation with Indian Constellation (NavIC) series!
— ISRO (@isro) January 26, 2025
Enhancing India’s regional navigation capabilities with precision and reliability 🛰️.
Getting closer to launch day with every moment! 🚀
More information at:… pic.twitter.com/1hwpPdTike
नेविगेशन सेवाओं में और होगा सुधार
इसरो के अनुसार, NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कंस्टीलेशन) भारत का स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है। इसका उद्देश्य भारत और भारतीय जमीन से 1,500 किमी तक फैले क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं को सटीक पोजीशन, वेलोसिटी और टाइमिंग सेवाएं प्रदान करना है। एनवीएस-01/02/03/04/05 को नेविगेशन सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए बेस लेयर कंस्टीलेशन को और मजबूत बनाने के लिए तैयार किया गया है।
🚀 Experience the rapid time-lapse footage!
— ISRO (@isro) January 25, 2025
GSLV-F15, fully integrated up to the Cryogenic Upper Stage was transported to the Second Launch Pad.
Hours of meticulous preparation condensed into mere seconds. 🛰️#GSLV #NAVIC #ISRO pic.twitter.com/CTjPzKhdOQ
सैटेलाइट यूआर सैटेलाइट सेंटर में डिजाइन और विकसित
इसरो ने कहा कि एनवीएस-02 सैटेलाइट सटीक समय माप के लिए स्वदेशी और खरीदी गई एटॉमिक क्लॉक्स का उपयोग करता है। यह सैटेलाइट यूआर सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) में अन्य केंद्रों के सहयोग से डिजाइन, विकसित और इंटीग्रेट किया गया है। जीएसएलवी-एफ15 भारत के भू-स्थिर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल का 17वां और स्वदेशी क्रायोजेनिक स्टेज के साथ 11वां मिशन है। यह स्वदेशी क्रायोजेनिक स्टेज के साथ जीएसएलवी का आठवां ऑपरेशनल मिशन भी है।