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ISRO: फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए संचार उपग्रह लॉन्च करेगी अंतरिक्ष एजेंसी, जानें स्पेसएक्स की मदद क्यों ली जा रही

Wed, 03 Jan 2024 08:24 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 03 Jan 2024 08:24 PM IST
सार

ISRO: इसरो इस साल स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए 4.7 टन वजनी संचार उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा। अंतरिक्ष एजेंसी के न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने आज इसका इसका एलान किया है।

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ISRO's NSIL to launch communication satellite on SpaceX's Falcon 9 rocket
Falcon 9 Rocket - फोटो : SpaceX (File)

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस साल की दूसरी तिहाई में स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए 4.7 टन वजनी संचार उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा। न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने बुधवार को इसका एलान किया। 

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एनएसआईएल ने कहा कि GSAT-20 संचार उपग्रह का उद्देश्य देश की ब्रॉडबैंड, इन-फ्लाइट और समुद्री संचार (आईएफएमसी) और सेलुलर बैकहॉल सेवाओं की जरूरतों को पूरा करना है। जीसैट-20 में का-का बैंड एचटीएस (हाई थ्रूपुट सैटेलाइट) क्षमता होगी, जिसमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह व लक्षद्वीप सहित पूरे देश को कवर करने वाले 32 बीम होंगे। इसे GSAT-N2 नाम दिया जाएगा।

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उसने आगे कहा, 'GSAT-20 उपग्रह पर लगी एचटीएस क्षमता का बड़ा हिस्सा भारतीय सेवा प्रदाताओं द्वारा पहले ही सुरक्षित कर लिया गया है।' इसरो का भारी उपग्रह प्रक्षेपण रॉकेट GSLV-MK3 जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में चार हजार किलोग्राम पेलोड तक ही कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है। इसलिए, उसे स्पेसएक्स एजेंसी से फाल्कन 9 रॉकेट की लॉन्च सेवाएं लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।  

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एक बयान में एनएसआईएल ने कहा, 'एनएसआईएल इसरो के जरिए GSAT-20 उपग्रह का निर्माण कर रहा है और इसे एनएसआईएल और स्पेसएक्स के बीच प्रक्षेपण सेवा अनुबंध के तहत फाल्कन-9 से प्रक्षेपित किया जाएगा।' स्पेसएक्स का फाल्कन -9 जीटीओ में 8,300 किलोग्राम पेलोड रखने में सक्षम है।

अब तक इसरो भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए फ्रांसीसी कंपनी एरियनस्पेस की सेवाओं का इस्तेमाल करता रहा है। इसरो अब अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) को विकसित कर रहा है, जिसमें जीटीओ में 10 हजार किलोग्राम पेलोड डालने की क्षमता होगी। 4,700 किलोग्राम वजनी GSAT-20 में करीब 48 जीबीपीएस की एचटीएस क्षमता है। उपग्रह को विशेष रूप से दूरस्थ/असंबद्ध क्षेत्रों की मांग वाली सेवा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

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