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ISRO: इसरो की सैटेलाइट्स को टकराने से बचाने के लिए 2025 में मिले 1.5 लाख अलर्ट, जारी की रिपोर्ट
Fri, 17 Apr 2026 04:33 AM IST
Nitin Gautam
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Fri, 17 Apr 2026 04:33 AM IST
सार
अंतरिक्ष में बढ़ते सैटेलाइट्स और अंतरिक्ष कचरे के चलते उपग्रहों के लिए सुरक्षा चुनौतियां बढ़ गई हैं। इसरो की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2025 में इसरो ने अपनी सैटेलाइट्स को टक्कर से बचाने के लिए 18 बार कोलिजन अवॉयडेंस मैन्यूवर किए।
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इसरो ईएसए समझौता 2026
- फोटो : isro
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विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपनी ताजा रिपोर्ट आईएसएसएआर 2025 में बताया है कि पिछले साल उसके उपग्रहों को टक्कर से बचाने के लिए 1.5 लाख से अधिक अलर्ट जारी किए गए। अंतरिक्ष में मलबे और उपग्रहों की बढ़ती संख्या के कारण सुरक्षा चुनौतियां बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में टकराने से बचने के लिए कुल 18 कोलिजन अवॉयडेंस मैन्यूवर किए गए, यानी टक्कर से बचाव के ऑपरेशन किए गए, जिनमें निसार सैटेलाइट भी शामिल था।
साल 2025 में वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड 328 लॉन्च प्रयास हुए, जिनसे 4,198 उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचे। वर्तमान में भारत के 22 उपग्रह लो अर्थ ऑर्बिट और 31 जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑर्बिट में सक्रिय हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया था कि मार्च 2026 तक भारतीय मिशनों से उत्पन्न अंतरिक्ष मलबे के 129 टुकड़े अब भी कक्षा में मौजूद हैं।
इसरो की रिपोर्ट के मुताबिक निसार सैटेलाइट के लिए नासा ने रिस्क मिटिगेशन मैन्यूवर की चेतावनी दी थी। यह सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा में तैनात है जहां सबसे ज्यादा अंतरिक्ष मलबा है। वहीं दूसरी ओर चंद्रयान-2 ऑर्बिटर को भी चंद्रमा की कक्षा में दो बार अपनी स्थिति बदलनी पड़ी। 1 जनवरी और 24 जुलाई 2025 को नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर के साथ इसकी टक्कर की स्थिति बन रही थी। इसरो ने समय रहते अपनी ऑर्बिटल पोजीशन बदली और टक्कर को बचा लिया।
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साल 2025 में वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड 328 लॉन्च प्रयास हुए, जिनसे 4,198 उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचे। वर्तमान में भारत के 22 उपग्रह लो अर्थ ऑर्बिट और 31 जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑर्बिट में सक्रिय हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया था कि मार्च 2026 तक भारतीय मिशनों से उत्पन्न अंतरिक्ष मलबे के 129 टुकड़े अब भी कक्षा में मौजूद हैं।
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इसरो की रिपोर्ट के मुताबिक निसार सैटेलाइट के लिए नासा ने रिस्क मिटिगेशन मैन्यूवर की चेतावनी दी थी। यह सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा में तैनात है जहां सबसे ज्यादा अंतरिक्ष मलबा है। वहीं दूसरी ओर चंद्रयान-2 ऑर्बिटर को भी चंद्रमा की कक्षा में दो बार अपनी स्थिति बदलनी पड़ी। 1 जनवरी और 24 जुलाई 2025 को नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर के साथ इसकी टक्कर की स्थिति बन रही थी। इसरो ने समय रहते अपनी ऑर्बिटल पोजीशन बदली और टक्कर को बचा लिया।
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