'सबसे पहले भारतीय हूं'...इसरो प्रमुख के सिवन ने जीता सबका दिल
- 'रॉकेट मैन' के नाम से भी जाने जाते हैं इसरो के चेयरमैन डॉ. के सिवन, संघर्षों में बीता था बचपन
- साइक्रोजेनिक इंजन, पीएसएलवी, जीएसएलवी और रियूजेबल लॉन्च व्हीकल कार्यक्रमों में विशेष योगदान
- 15 फरवरी 2017 को भारत ने एकसाथ प्रक्षेपित किए थे 104 उपग्रह, सिवन ने निभाई थी अहम भूमिका
- 1982 में इसरो से जुड़े थे डॉ सिवन, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के निदेशक पद पर भी रहे
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विस्तार
अंतरिक्ष के इतिहास में भारत को नई कामयाबियों पर पहुंचाने वाले इसरो के प्रमुख के सिवन ने देश को जश्न मनाने के कई मौके दिए हैं। भारत के मून मिशन चंद्रयान-2 के सूत्रधार के तौर पर वह हमेशा याद किए जाएंगे। लगभग 95 फीसदी सफल होने वाले इस चंद्र मिशन में भले ही संपर्क टूट जाने से इसरो लैंडर विक्रम की सफल लैंडिंग कराने में नाकाम रहा हो, लेकिन ऑर्बिटर के एकदम सही काम करने से इसकी महत्ता और सिवन की मेहनत व्यर्थ होने वाली नहीं है। ऑर्बिटर द्वारा भेजी थर्मल तस्वीरों से पता चला है कि लैंडर एकदम सही है। इसरो लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है।
संपर्क टूटने के बाद इसरो प्रमुख सिवन खुद को रोक नहीं सके थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने ही उनकी आंखों से आंसू छलक आए थे। प्रधानमंत्री ने उन्हें गले लगाते हुए सांत्वना दी थी। सोशल मीडिया पर सिवन की यह भावुक तस्वीर खूब वायरल हुई थी और लोगों ने उनके जज्बे को सलाम किया था। अब सिवन एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। इस बार जिस वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर वाहवाही मिल रही है वह एक वीडियो क्लिप है, जिसमें सिवन खुद को पहले एक भारतीय बताते हुए नजर आ रहे हैं। एक क्षेत्रीय चैनल के इंटरव्यू में कही गई सिवन की यह बात सबका दिल जीत रही है।
SunTV: As a Tamil, having attained a big position, what do u want to say to ppl of TN?
Sivan: First of all, I am an Indian, I joined #ISRO as an Indian & ISRO is a place where people from all regions & languages work, contribute, but I am grateful to my brothers who celebrate me pic.twitter.com/tES7uzNCJOविज्ञापन विज्ञापन— Ethirajan Srinivasan (@Ethirajans) September 10, 2019
जनवरी 2018 में सिवन ने एक क्षेत्रीय समाचार चैनल को इंटरव्यू दिया था। इस दौरान पत्रकार ने उनसे सवाल किया था कि एक तमिल व्यक्ति के तौर पर आप इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं, तमिलनाडु के लोगों के लिए आप क्या कहना चाहेंगे? इस पर सिवन ने जो जवाब दिया वह जानकर आपको भी गर्व होगा। सिवन ने कहा, 'सबसे पहले मैं एक भारतीय हूं। मैंने एक भारतीय के रूप में इसरो जॉइन किया। इसरो ऐसी जगह है जहां सभी क्षेत्रों और अलग-अलग भाषाओं वाले लोग एक साथ काम करते हैं और अपना योगदान देते हैं। मैं अपने भाइयों के प्रति आभारी हूं, जो मेरी प्रशंसा करते हैं।'
किसान परिवार में हुआ था सिवन का जन्म
इसरो प्रमुख का पूरा नाम डॉ. कैलाशवडिवू सिवन (K Sivan) है। 14 अप्रैल 1957 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के सराक्कलविलाई गांव में एक किसान के घर उनका जन्म हुआ था। सिवन ने एक सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से पढ़ाई की है। नागेरकोयल के एसटी हिंदू कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया। सिवन स्नातक करने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य हैं। उनके भाई और बहन गरीबी के कारण अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पाए। लेकिन सिवन का सफर यहीं नहीं रुका। 1980 में उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (IISc) से इंजीनियरिंग में पीजी की पढ़ाई की। फिर 2006 में उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।
2018 में नियुक्त किए गए थे इसरो चेयरमैन
साल 2018 में सिवन को इसरो का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उनसे पहले इस पद पर ए. एस. किरण कुमार थे। के. सिवन के अनुसार, जब वह कॉलेज में थे तो खेतों में अपने पिता की मदद भी करते थे। इस कारण स्नातक में उनका दाखिला घर के पास के कॉलेज में ही करा दिया गया था। लेकिन जब उन्हें बीएससी में मैथ्स में 100 फीसदी अंक मिले, तो उन्होंने पढ़ाई पर पूरा ध्यान देने का मन बना लिया।
सिवन के अनुसार, बचपन में उनके पास पहनने के लिए जूते-चप्पल भी नहीं थे। वे अक्सर नंगे पैर ही रहा करते। कॉलेज तक धोती पहनते थे। एमआईटी में दाखिला लेने के बाद उन्होंने पहली बार पैंट पहनी। वह कभी ट्यूशन या कोचिंग क्लास भी नहीं गए। सिवन ने साल 1982 में इसरो ज्वाइन किया था। यहां उन्होंने लगभग हर रॉकेट कार्यक्रम में काम किया है। इसरो प्रमुख बनने से पहले वह रॉकेट बनाने वाले विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के निदेशक भी थे।